सेंसेक्स-निफ्टी में अचानक आई गिरावट; जानें विदेशी बाजारों की किस चाल ने बिगाड़ा खेल?
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते आईटी और एफएमसीजी शेयरों में मुनाफावसूली से बाजार पर दबाव बढ़ा।

मुंबई स्थित बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) की मुख्य इमारत के बाहर लगा डिजिटल टिकर बोर्ड, जो गुरुवार के कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स में आई गिरावट के आंकड़े प्रदर्शित कर रहा है।
Share market closing update 2026 : वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर और निराशाजनक संकेतों के साथ-साथ पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में लगातार गहराते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सप्ताह के चौथे कारोबारी सत्र यानी गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार भारी उतार-चढ़ाव का गवाह बना। दलाल स्ट्रीट पर सुबह के सत्र में भारी लिवाली और उत्साहजनक शुरुआत देखी गई थी, लेकिन ऊपरी स्तरों पर सक्रिय हुए मंदड़ियों और मुनाफावसूली के भारी दबाव के चलते बाजार अपनी शुरुआती बढ़त को बरकरार रखने में पूरी तरह विफल साबित हुआ। नतीजतन, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 बेहद मामूली कमजोरी दिखाते हुए अंततः लाल निशान के साथ फ्लैट बंद हुए। बाजार में आई इस गिरावट के पीछे मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और तेजी से बिकने वाले उपभोक्ता सामानों (एफएमसीजी) से जुड़े हैवीवेट शेयरों में हुई तगड़ी बिकवाली को मुख्य जिम्मेदार माना जा रहा है।
इस उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र के अंतिम आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो एनएसई का प्रमुख सूचकांक निफ्टी50 महज 4.30 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की नाममात्र गिरावट के साथ 23,654.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं दूसरी ओर, बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 135.03 अंक यानी 0.18 प्रतिशत फिसलकर 75,183.36 के स्तर पर जाकर थमा। इससे पहले सुबह बाजार की शुरुआत शानदार गैप-अप ओपनिंग के साथ हुई थी, जहां सेंसेक्स 75,732.42 पर खुलकर दिन के उच्चतम स्तर 75,945.79 तक पहुंचने में सफल रहा था, लेकिन बिकवाली के दौर ने इसे 74,996.78 के इंट्रा-डे निचले स्तर तक गोता लगाने पर मजबूर कर दिया। ठीक इसी तरह, निफ्टी ने भी 23,830.05 पर मजबूत शुरुआत कर 23,859.90 का इंट्रा-डे हाई बनाया था, पर सत्र के दौरान यह 23,596.60 के निचले स्तर तक टूट गया था, जो बाजार में मौजूद भारी अस्थिरता को बयां करता है।
मुख्य सूचकांकों में आई इस सुस्ती के विपरीत, देश के व्यापक बाजारों (ब्रॉडर मार्केट्स) में आज निवेशकों की धारणा काफी मजबूत दर्ज की गई। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स जहां शानदार खरीदारी के दम पर 0.63 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहा, वहीं निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में मामूली बिकवाली के चलते महज 0.04 प्रतिशत की सुस्त गिरावट दर्ज की गई। सेक्टोरल प्रदर्शन का बारीकी से विश्लेषण करने पर यह साफ होता है कि आज के पूरे खेल को बिगाड़ने का काम मुख्य रूप से निफ्टी आईटी, निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स ने किया, जहां निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद सुरक्षित रुख अपनाते हुए भारी मुनाफावसूली की। इसके विपरीत, जमीन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सेक्टर्स में आज भारी लिवाली का माहौल रहा, जिसके चलते निफ्टी रियल्टी और निफ्टी सीमेंट इंडेक्स के शेयर बाजार को सहारा देते हुए सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर्स की सूची में शुमार रहे।
निफ्टी50 के अंतर्गत शामिल दिग्गज कंपनियों के व्यक्तिगत शेयरों की स्थिति को देखें तो आज ग्रासिम, विमानन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंडिगो, अपोलो हॉस्पिटल्स, बजाज-ऑटो, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), एचडीएफसी लाइफ, मैक्स हेल्थकेयर, हिंडाल्को और विप्रो के शेयर मजबूत खरीदारी के सहारे सबसे ज्यादा मुनाफे के साथ शीर्ष गेनर्स की सूची में काबिज रहे। इसके बिल्कुल विपरीत, भारी वित्तीय दबाव और सेक्टोरल कमजोरी के चलते बजाज फाइनेंस, हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल), टेक महिंद्रा, इंफोसिस, बजाज फिनसर्व, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और टेलीकॉम क्षेत्र की भारती एयरटेल के शेयरों को निवेशकों की बेरुखी का सामना करना पड़ा और ये आज के सत्र के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले यानी टॉप लूजर्स साबित हुए। इस पूरे उतार-चढ़ाव के बीच एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि बीएसई में सूचीबद्ध कुल कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) पिछले सत्र के 461 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 462 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जिससे कागजी तौर पर निवेशकों की झोली में करीब 1 लाख करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज हुआ।
वैधानिक और व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण से, इस समय पूरे विश्व के वित्तीय बाजारों पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक टिप्पणियों का गहरा साया मंडरा रहा है। फेडरल रिजर्व के नीति-निर्धारकों के हालिया कड़े रुख के बाद वैश्विक स्तर पर यह आशंका बहुत ज्यादा बढ़ गई है कि आने वाले लंबे समय तक केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरें और सरकारी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तरों पर ही टिके रहेंगे, जो इक्विटी बाजारों से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के फंड आउटफ्लो को तेज कर रहा है। इसके साथ ही, तकनीकी विश्लेषण के मोमेंटम इंडिकेटर आरएसआई (14) का स्तर फिलहाल 44 के आस-पास दर्ज किया जा रहा है, जो बाजार के किसी मजबूत अपट्रेंड में न होने की पुष्टि करता है। बाजार के इस तकनीकी और वैधानिक परिदृश्य से यह साफ संदेश मिलता है कि आने वाले कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान भारतीय शेयर बाजार किसी बड़ी एकतरफा रैली के बजाय एक सीमित दायरे (रेंज-बाउंड) में कमजोर और सतर्क रुख के साथ ही अपनी चाल आगे बढ़ाएगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
