Indian Rupee vs doller : भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मौजूदा समय चुनौतियों और उपलब्धियों के एक मिले-जुले दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां रुपया अपने जीवनकाल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, वहीं दूसरी ओर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सक्रियता और विदेशी मुद्रा भंडार के नए कीर्तिमानों ने निवेशकों को उम्मीद की किरण दिखाई है। आयातकों की ओर से भारी डॉलर मांग और इस महीने शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों द्वारा की गई 3.5 बिलियन डॉलर की भारी निकासी ने रुपये को रिकॉर्ड कमजोरी की ओर धकेल दिया है।

आर्थिक दबाव: रुपये में 6% की वार्षिक गिरावट :

घरेलू मुद्रा पर दबाव का सबसे बड़ा कारण रिकॉर्ड व्यापार घाटा और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भारतीय बाजार से मोहभंग होना माना जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, रुपया इस वर्ष अब तक 6 प्रतिशत टूट चुका है।

गिरावट के मुख्य कारक :

  • डॉलर की मांग: कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं के आयात के लिए आयातकों द्वारा डॉलर की आक्रामक खरीदारी।
  • FII बिकवाली: इस महीने इक्विटी बाजार से लगभग 3.5 बिलियन डॉलर की निकासी।
  • व्यापार घाटा: निर्यात की तुलना में आयात का स्तर बढ़ने से चालू खाता घाटा (CAD) पर दबाव।
  • RBI का 'एक्शन प्लान': बाजार में नकदी का संचार

मुद्रा बाजार में पैदा हुई अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए रिजर्व बैंक ने अपने हथियारों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखते हुए बाजार में नकदी के प्रवाह को संतुलित करने के लिए कई कदम उठाए हैं:

  • लिक्विडिटी ऑपरेशंस: बाजार की तंग स्थिति को सुधारने के लिए ₹25,000 करोड़ का नकदी परिचालन किया गया।
  • स्वैप नीलामी: मुद्रा बाजार में डॉलर की तरलता सुनिश्चित करने के लिए 10 बिलियन डॉलर की 'स्वैप नीलामी' आयोजित की गई।
  • ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO): बैंकिंग प्रणाली में तरलता बढ़ाने के लिए ₹1 लाख करोड़ के खुले बाजार के परिचालन (खरीद) किए गए।
  • विदेशी मुद्रा भंडार: 700 अरब डॉलर के पार

इस आर्थिक उथल-पुथल के बीच भारत के लिए सबसे सकारात्मक खबर विदेशी मुद्रा भंडार से आई है। विविधीकरण की रणनीति के तहत अमेरिकी ट्रेजरी बांड्स पर निर्भरता कम करने के कारण भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 701.36 बिलियन डॉलर के अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

सोशल मीडिया पर छिड़ा राजनीतिक युद्ध :

जमीनी अर्थव्यवस्था के इन आंकड़ों ने सोशल मीडिया पर भी गर्मी बढ़ा दी है। रुपये की गिरावट को लेकर जहां विपक्षी दल 'मीम्स' के जरिए सरकार को घेर रहे हैं, वहीं सरकार की ओर से आधिकारिक पोस्ट्स के जरिए विदेशी मुद्रा भंडार की मजबूती और बुनियादी आर्थिक ढांचे का बचाव किया जा रहा है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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