भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंकों में शुमार Indian Overseas Bank आज देश के वित्तीय तंत्र में एक सशक्त और विश्वसनीय संस्था के रूप में स्थापित है। मार्च 2024 तक हजारों शाखाओं, एटीएम नेटवर्क और लाखों ग्राहकों के व्यापक आधार के साथ यह बैंक न केवल घरेलू बैंकिंग सेवाओं में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराता रहा है। हाल के वर्षों में इसका बाजार पूंजीकरण एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार करना इसकी वित्तीय मजबूती और निवेशकों के भरोसे का संकेत माना जाता है।

इस मजबूत स्थिति के पीछे एक लंबा और ऐतिहासिक सफर रहा है, जिसकी शुरुआत फरवरी 1937 में हुई थी, जब प्रख्यात उद्योगपति एम. सी. टी. एम. चिदंबरम चेट्टियार ने चेन्नई को मुख्यालय बनाकर इस बैंक की स्थापना की। उस दौर में इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी व्यापार और विदेशी मुद्रा लेनदेन को बढ़ावा देना था। यही वजह रही कि बैंक ने अपनी शुरुआत ही एक साथ कराईकुडी, मद्रास और रंगून में शाखाएं खोलकर की, और जल्द ही सिंगापुर, कुआलालंपुर तथा पेनांग जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक केंद्रों तक अपनी पहुंच बना ली। इस तरह प्रारंभ से ही यह बैंक वैश्विक दृष्टिकोण के साथ कार्य करता रहा।

द्वितीय विश्व युद्ध और बदलते राजनीतिक हालातों के बीच बैंक को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें कुछ विदेशी शाखाओं का नुकसान भी शामिल था। इसके बावजूद युद्ध के बाद बैंक ने कोलंबो, बैंकॉक और हांगकांग जैसे महत्वपूर्ण शहरों में विस्तार कर अपनी उपस्थिति को फिर से मजबूत किया। 1960 के दशक में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के पुनर्गठन के दौरान इसने कई छोटे बैंकों का अधिग्रहण कर अपनी शाखा संख्या और ग्राहक आधार को बढ़ाया, जिससे इसकी घरेलू पकड़ मजबूत होती चली गई।

साल 1969 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीयकरण के बाद बैंक की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आया। जहां पहले इसका फोकस विदेशी बाजारों पर था, वहीं इसके बाद इसने ग्रामीण भारत और आम नागरिकों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया। इस दौर में बैंक ने देश के दूरदराज क्षेत्रों में शाखाओं का तेजी से विस्तार किया, जिससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला और इसकी विश्वसनीयता आम जनता के बीच और गहरी होती चली गई।

नई सहस्त्राब्दी में प्रवेश करते हुए बैंक ने तकनीकी और संरचनात्मक सुधारों को अपनाया। वर्ष 2000 में सार्वजनिक निर्गम के जरिए पूंजी बाजार में प्रवेश, मोबाइल बैंकिंग सेवाओं की शुरुआत, कोर बैंकिंग प्रणाली का कार्यान्वयन और विभिन्न सहकारी बैंकों के अधिग्रहण जैसे कदमों ने इसे आधुनिक बैंकिंग के अनुरूप ढाला। साथ ही, दुबई, कुआलालंपुर और चीन जैसे स्थानों पर प्रतिनिधि कार्यालय खोलकर इसने अपने अंतरराष्ट्रीय विस्तार को भी नया आयाम दिया।

आज के समय में यह बैंक लगभग 3200 से अधिक शाखाओं, 3500 से ज्यादा एटीएम और हजारों बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स के नेटवर्क के साथ देशभर में सक्रिय है। डिजिटल बैंकिंग यूनिट्स और वैश्विक शाखाओं के जरिए यह ग्राहकों को आधुनिक और सुविधाजनक सेवाएं प्रदान कर रहा है। अपनी ऐतिहासिक विरासत, रणनीतिक विस्तार और समय के साथ खुद को ढालने की क्षमता के कारण इंडियन ओवरसीज बैंक ने न केवल अपनी पहचान बनाई है, बल्कि दशकों से ग्राहकों और निवेशकों के बीच अटूट विश्वास भी कायम रखा है।

Pratahkal Bureau

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