भारतीय अर्थव्यवस्था की वैश्विक रैंकिंग और उसकी नॉमिनल जीडीपी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर संसद में एक महत्वपूर्ण आधिकारिक जानकारी सामने आई है। राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने हाल ही में देश की आर्थिक स्थिति, मुद्रा विनिमय दरों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की रिपोर्ट के आधार पर विस्तृत विवरण साझा किया है। इस दौरान सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि किन प्रमुख कारणों के चलते भारत की ग्लोबल इकोनॉमिक रैंकिंग में फेरबदल हुआ है और वर्तमान में देश की वित्तीय स्थिति कितनी मजबूत बनी हुई है।

संसद में प्रस्तुत आंकड़ों और रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के आधार पर किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का आकार मुख्य रूप से नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ रेट और करेंसी एक्सचेंज रेट जैसी प्रमुख आर्थिक चीजों पर निर्भर करता है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड की अप्रैल 2026 की 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की नॉमिनल जीडीपी 3.92 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है, जिसके आधार पर भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में दर्ज किया गया है। वित्त राज्य मंत्री ने यह जानकारी एक सवाल के लिखित जवाब में सदन को दी।

विभिन्न वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले रैंकिंग में आए इस बदलाव के पीछे कई तकनीकी और आर्थिक कारण काम कर रहे हैं। सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की विनिमय दर में जो अंतर आया है और नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ रेट में जो बदलाव देखे गए हैं, वे इस रैंकिंग को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी में 2022-23 को आधार वर्ष (बेस ईयर) बनाने वाली नई जीडीपी सीरीज को लागू किए जाने से भी अर्थव्यवस्था के नॉमिनल आकार के आंकड़ों में बदलाव आया है। नई सीरीज के तहत वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नॉमिनल जीडीपी को 345.47 ट्रिलियन रुपये तय किया गया है, जिसके चलते पुरानी सीरीज की तुलना में गणना के पैमाने में अंतर आया है।

रैंकिंग के इन आंकड़ों के बीच सरकार ने देश के मजबूत आर्थिक fondamentals पर भी विशेष जोर दिया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, तमाम वैश्विक उतार-चढ़ाव और विनिमय दरों के दबाव के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। हाल ही में फिच रेटिंग्स जैसी प्रतिष्ठित वैश्विक एजेंसियों द्वारा भी भारत की सॉवरेन रेटिंग को 'स्टेबल आउटलुक' के साथ 'BBB-' के स्तर पर बरकरार रखा गया है। यह स्थिर रेटिंग देश की मजबूत विकास संभावनाओं, ठोस बाहरी वित्तीय स्थिति और आर्थिक अनुशासन को दर्शाती है। सरकार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के भीतर और बाहर आर्थिक नीतियों तथा विकास दरों को लेकर लगातार विमर्श जारी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था दीर्घकालिक मजबूती और निरंतर प्रगति के मार्ग पर अग्रसर है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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