नई दिल्ली: भारतीय विमानन क्षेत्र इस समय अपने अब तक के सबसे गंभीर संकटों में से एक का सामना कर रहा है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA), जिसमें देश की दिग्गज विमानन कंपनियां एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट शामिल हैं, ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का परिचालन पूरी तरह से ठप हो सकता है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय को लिखे एक आधिकारिक पत्र में एयरलाइन संस्था ने उद्योग के 'अत्यधिक दबाव' में होने की बात कही है, जो अब बंद होने की कगार पर पहुंच गया है।

इस संकट की मुख्य जड़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में हुआ अप्रत्याशित उछाल है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, विशेष रूप से अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ की गई कार्रवाइयों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को अस्त-व्यस्त कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, वहां जारी नाकेबंदी के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 72 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 118 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर एटीएफ की कीमतों पर पड़ा है, जिनमें रिकॉर्ड 295 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमत में 73 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई है। एफआईए ने स्पष्ट किया है कि आमतौर पर ईंधन की लागत एक एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का 30 से 40 प्रतिशत होती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह बढ़कर 55 से 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके साथ ही, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी ने विमानन कंपनियों के वित्तीय बोझ को और अधिक बढ़ा दिया है। संस्था के मुताबिक, अप्रैल 2026 में एविएशन सेक्टर को जो घाटा हुआ है, उसने अंतरराष्ट्रीय परिचालन को व्यावहारिक रूप से असंभव बना दिया है।

इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख प्रस्ताव रखे हैं। पहला, रिफाइनरी मार्जिन को नियंत्रित करने के लिए 'क्रैक बैंड' फॉर्मूले को फिर से लागू करना। दूसरा, घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ पर लागू 11 प्रतिशत की एक्साइज ड्यूटी को अस्थायी रूप से स्थगित करना। तीसरा सुझाव दिल्ली और तमिलनाडु जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में मूल्य वर्धित कर (VAT) को कम करने का है। वर्तमान में मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे महानगरों में वैट की दरें 16 से 20 प्रतिशत के उच्च स्तर पर हैं, जिससे भारतीय एयरलाइंस को वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के सामने वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।

विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं करती है, तो न केवल हजारों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं, बल्कि हवाई यात्रा की लागत भी आम नागरिकों की पहुंच से बाहर हो जाएगी। विमानन उद्योग का यह संकट केवल व्यावसायिक घाटे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक कनेक्टिविटी और वैश्विक व्यापार संबंधों को भी सीधे तौर पर प्रभावित करने की क्षमता रखता है।


Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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