कच्चे तेल और गैस की आग में झुलसा मार्च; थोक महंगाई दर उछलकर 3.88% के पार
भारत में थोक महंगाई (WPI) मार्च में बढ़कर 3.88% हुई। कच्चे तेल और गैस की कीमतों में 36% की बढ़त ने बिगाड़ा बजट। जानें किन चीजों के दाम बढ़े और विशेषज्ञों की क्या है राय।

India WPI Inflation March 2026 : भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मार्च का महीना महंगाई के मोर्चे पर भारी दबाव लेकर आया है। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर में एक बड़ी छलांग दर्ज की गई है, जिसने नीति निर्माताओं और आम जनता दोनों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में जो महंगाई दर 2.13 प्रतिशत के स्तर पर थी, वह मार्च में तेजी से बढ़कर 3.88 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इस अप्रत्याशित बढ़त के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता ने न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन को महंगा किया है, बल्कि घरेलू स्तर पर विनिर्माण और ऊर्जा लागत को भी सीधे तौर पर प्रभावित किया है।
इस महंगाई विस्फोट का सबसे गहरा असर ईंधन और बिजली श्रेणी में देखने को मिला है। मार्च के दौरान इस सेक्टर में महंगाई दर 4.13 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसका मुख्य आधार कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में हुई 36.16 प्रतिशत की भारी-भरकम वृद्धि रही। हालांकि, बिजली की कीमतों में आई 5.07 प्रतिशत की गिरावट ने इस आंकड़े को कुछ हद तक थामने का प्रयास किया, लेकिन कच्चे तेल की 'आग' के सामने यह राहत नाकाफी साबित हुई। विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) की स्थिति भी चिंताजनक है, जहाँ 22 में से 16 प्रमुख उत्पादों की कीमतों में इजाफा हुआ है। इस श्रेणी में महंगाई 0.88 प्रतिशत रही, जो औद्योगिक उत्पादन लागत बढ़ने का स्पष्ट संकेत है।
खाद्य मोर्चे पर स्थिति मिली-जुली रही है। थोक खाद्य महंगाई भले ही 1.85 प्रतिशत पर स्थिर रही हो, लेकिन खुदरा स्तर (CPI) पर उपभोक्ताओं को सब्जियों के बढ़ते दामों ने परेशान किया। मार्च में खुदरा महंगाई 3.4 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिसमें टमाटर और फूलगोभी जैसी सब्जियों के दाम चढ़ने का बड़ा योगदान रहा। हालांकि, प्याज, आलू और लहसुन की कीमतों में आई दो अंकों की गिरावट ने रसोई के बजट को थोड़ा सहारा दिया। दालों के मोर्चे पर भी राहत की खबर रही, जहाँ अरहर और चने की कीमतों में कमी देखी गई। रिपोर्ट का एक और चौंकाने वाला पहलू आभूषणों की कीमतों में आया उछाल रहा, जहाँ चांदी के आभूषणों में 148.61% और सोने के आभूषणों में 45.92% की रिकॉर्ड तोड़ महंगाई दर्ज की गई है।
निष्कर्षतः, भारत के लिए आने वाले समय में महंगाई प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होने वाला है। थोक और खुदरा महंगाई का यह बढ़ता ग्राफ सीधे तौर पर आम आदमी की क्रय शक्ति और उद्योगों के मुनाफे को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक घरेलू बाजार में राहत की उम्मीद कम है। सरकार और केंद्रीय बैंक के लिए अब संतुलन बनाना अनिवार्य हो गया है, क्योंकि विनिर्माण और ऊर्जा की बढ़ती लागत आने वाले महीनों में अन्य वस्तुओं की कीमतों को भी ऊपर खींच सकती है, जो अंततः आर्थिक विकास की रफ्तार को धीमा करने का जोखिम पैदा करती है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
