नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक मंच पर तेजी से उभरते भारत के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नवीनतम आंकड़ों और संशोधित घरेलू अनुमानों के अनुसार, भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का गौरव खोकर छठे स्थान पर खिसक गया है। विकास की मजबूत उम्मीदों और तेज रफ्तार के दावों के बीच, भारत अब यूनाइटेड किंगडम (UK) से पीछे हो गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुमानों के मुताबिक, भारत की जीडीपी का आकार $4.15 ट्रिलियन रहने की संभावना है, जबकि ब्रिटेन $4.26 ट्रिलियन के साथ एक पायदान ऊपर चढ़कर पांचवें स्थान पर काबिज हो गया है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर था।

इस रैंकिंग में गिरावट का मुख्य कारण केवल विकास दर नहीं, बल्कि तकनीकी और मौद्रिक कारक माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत सरकार द्वारा जीडीपी की गणना के लिए 'बेस ईयर' यानी आधार वर्ष में किए गए हालिया संशोधन ने नॉमिनल जीडीपी के अनुमानों को कम कर दिया है। फरवरी में जारी अपडेटेड डेटा के अनुसार, नई श्रृंखला के तहत नॉमिनल जीडीपी 357 लाख करोड़ रुपये से घटकर 345.5 लाख करोड़ रुपये रह गई है। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की गिरती कीमत ने भी इस वैश्विक रैंकिंग में भारत को नुकसान पहुंचाया है। वित्तीय वर्ष 2026 में रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 11 प्रतिशत तक कमजोर हुआ है, जिससे डॉलर के मूल्य में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार उम्मीद से छोटा नजर आ रहा है।

हालांकि, आईएमएफ ने भारत की वास्तविक विकास दर के अनुमानों में सुधार किया है। आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है, जबकि घरेलू अनुमान इसे वित्त वर्ष 2026 में 7.4 प्रतिशत तक देख रहे हैं। आंकड़ों का यह विरोधाभास दर्शाता है कि जमीन पर उत्पादन और सेवाओं में वृद्धि तो हो रही है, लेकिन मुद्रा के मूल्यह्रास और सांख्यिकीय बदलावों के कारण वैश्विक पटल पर भारत की स्थिति प्रभावित हुई है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता के अनुसार, बेस ईयर में बदलाव और रुपये की कमजोरी का दोहरा प्रभाव इस रैंकिंग में गिरावट का प्रमुख कारण बना है।

भारत के लिए अब चौथी और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह थोड़ी और लंबी हो गई है। पहले के अनुमानों के अनुसार भारत द्वारा वर्ष 2025 तक जापान को पछाड़कर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद थी, जो अब फिलहाल टलती नजर आ रही है। संशोधित अनुमानों के मुताबिक, अब भारत 2031 तक जर्मनी को पीछे छोड़ पाएगा, जो कि पहले के आईएमएफ अनुमानों से दो साल बाद का समय है। इन चुनौतियों के बावजूद, सकारात्मक पक्ष यह है कि 2021 से 2025 के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने 8.56 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक विकास दर (CAGR) दर्ज की है, जो दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज है। आने वाले वर्षों में सरकार की आर्थिक नीतियों और रुपये की स्थिरता पर ही यह निर्भर करेगा कि भारत अपनी खोई हुई रैंकिंग को कितनी जल्दी वापस पाता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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