महंगाई की मार- अप्रैल में 3.48% पर पहुंचा आंकड़ा, आभूषण और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल|
पश्चिम एशिया संघर्ष और खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से खुदरा महंगाई में मामूली बढ़ोतरी दर्ज, आभूषणों की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल।

चित्र में एक टोकरी में भारतीय मुद्रा के नोट और विभिन्न फल व सब्जियां दिखाई दे रही हैं जो महंगाई के प्रभाव को दर्शाती हैं।
वैश्विक अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष का असर अब भारतीय बाजारों और आम आदमी की जेब पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में भारत की खुदरा महंगाई दर मामूली बढ़त के साथ 3.48 फीसदी पर पहुंच गई है। मार्च के महीने में यह दर 3.40 फीसदी दर्ज की गई थी। महंगाई में यह इजाफा मुख्य रूप से सोने-चांदी के आभूषणों और रसोई के आवश्यक खाद्य उत्पादों की कीमतों में हुई वृद्धि के कारण देखा गया है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित इस महंगाई दर में क्रमिक वृद्धि देखी जा रही है। गौरतलब है कि साल की शुरुआत में जनवरी में महंगाई दर 2.74 फीसदी और फरवरी में 3.21 फीसदी थी। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि खाद्य उत्पादों की कीमतें बढ़ने से खाद्य महंगाई दर सालाना आधार पर मार्च के 3.87 फीसदी से बढ़कर अप्रैल में 4.2 फीसदी हो गई है। यह वृद्धि घरेलू बजट के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है, क्योंकि बुनियादी जरूरतों के लिए अब अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव पर नजर डालें तो चांदी से बने आभूषणों में सबसे अधिक 144.34 फीसदी की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, नारियल और कोपरा की कीमतों में 44.55 फीसदी, जबकि सोना, हीरा और प्लैटिनम के आभूषणों में 40.72 फीसदी का उछाल आया है। सब्जियों की बात करें तो टमाटर (35.28 फीसदी) और फूलगोभी (25.58 फीसदी) के दाम भी आसमान छू रहे हैं। हालांकि, उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह रही कि आलू, प्याज, मटर जैसी सब्जियों के साथ-साथ कार, जीप और एयर कंडीशनर की कीमतों में इस अवधि के दौरान गिरावट दर्ज की गई।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पहले ही इस स्थिति के प्रति आगाह किया था। पिछले महीने जारी अपनी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में आरबीआई ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को ऊर्जा संसाधनों की ऊंची कीमतों का मुख्य कारण बताया था। साथ ही 'अल नीनो' के संभावित प्रभाव को देखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 4.6 फीसदी जताया गया है। आरबीआई के अनुसार, वैश्विक तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने से महंगाई का जोखिम बना रह सकता है।
महंगाई के भौगोलिक वितरण पर गौर करें तो ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.74 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 3.16 फीसदी रही। राज्यों के स्तर पर भारी असमानता देखी गई है, जहां तेलंगाना 5.81 फीसदी महंगाई दर के साथ सबसे प्रभावित राज्य रहा, वहीं मिजोरम में यह दर सबसे कम महज 0.69 फीसदी दर्ज की गई। एनएसओ देश भर के 1,407 शहरी बाजारों और 1,465 गांवों से वास्तविक समय के आंकड़े जुटाकर यह रिपोर्ट तैयार करता है, जो देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति का सटीक प्रतिबिंब पेश करती है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
