लगादार तीसरी बार बढ़ीं पेट्रोल-डीजल की कीमतें ; क्या भारत की अर्थव्यवस्था फिर गिरेगी खाई में ?
ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद किए जाने से वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति 20 प्रतिशत बाधित, घरेलू बाजार में ईंधन के दाम करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़े।

पश्चिम एशिया में कच्चे तेल के संकट के कारण भारत में ईंधन, घरेलू एलपीजी, परिवहन और दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर बढ़ते मुद्रास्फीति के दबाव को दर्शाता एक प्रतीकात्मक चित्रण।
Fuel Price Hike India : पश्चिम एशिया में गहराते तेल संकट के बीच भारतीय उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी का असर अब घरेलू बाजार पर साफ दिखने लगा है, जिसने देश के आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है। सरकारी तेल कंपनियों ने शनिवार को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी कर दी है। पिछले कुछ ही दिनों के भीतर यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है, जिसने ईंधन की कीमतों को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। शनिवार को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में प्रति लीटर 91 पैसे तक का इजाफा किया है। इस ताजा बढ़ोतरी से पहले 15 मई और 19 मई को भी कीमतों में वृद्धि की गई थी, जिसके चलते पिछले कुछ दिनों में कुल मिलाकर ईंधन के दाम करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं।
इस अचानक आई तेजी के पीछे मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में उपजा गंभीर भू-राजनीतिक संकट है। इसी साल 28 फरवरी, 2026 को भड़के एक भीषण संघर्ष के बाद ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) को पूरी तरह बंद कर दिया था। गौरतलब है कि दुनिया के कुल तेल प्रवाह का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। इस रास्ते के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। चूंकि भारत अपनी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक स्तर पर बढ़ी हुई इस लागत का बोझ अब सीधे तौर पर घरेलू कीमतों के जरिए उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम पर जहां एक तरफ सरकार का अपना तर्क है, वहीं दूसरी तरफ इसे लेकर सियासी घमासान भी तेज हो गया है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि फरवरी से शुरू हुए इस वैश्विक संकट के बाद भी भारत में ईंधन की कीमतों में केवल 5 से 5.3 प्रतिशत तक की ही वृद्धि हुई है, जो कि दुनिया भर में सबसे कम है। सरकार के मुताबिक, अमेरिका, पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों की तुलना में भारत ने अपने नागरिकों को वैश्विक महंगाई के इस बड़े झटके से काफी हद तक बचाकर रखा है। इसके विपरीत, विपक्ष ने इस कदम को लेकर सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे आम परिवारों पर यह अतिरिक्त बोझ बेहद क्रूर है। इसके साथ ही उन्होंने ईंधन पर लगाए जा रहे भारी-भरकम करों (टैक्स) को लेकर भी सरकार की आलोचना की है और इसमें तुरंत कटौती की मांग की है।
पूरे देश में तेल-गैस के बढ़ते दामों और किल्लत से हाहाकार मचा हुआ है। रूस और ईरान हमें सस्ते दामों पर तेल देने को तैयार हैं। क्या हमें रूस और ईरान से सस्ता गैस और तेल खरीदना चाहिए? आपकी क्या राय है। pic.twitter.com/zf0Q93XyMt
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) May 23, 2026
ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही यह बढ़ोतरी केवल वाहनों के संचालन तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि इसका एक व्यापक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव देखने को मिलेगा। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई और परिवहन लागत का सीधा बढ़ना तय है, जो अंततः दैनिक उपभोग की आवश्यक वस्तुओं और खाद्य पदार्थों को महंगा कर देगा। पश्चिम एशिया के इस अशांत दौर में, जहां वैश्विक ऊर्जा बाजार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, वहीं घरेलू मोर्चे पर ईंधन के इन बढ़ते दामों ने भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता के सामने एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले दिनों में यह संकट क्या रूप लेता है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
