MEI सेक्टर में नौकरियों की बहार; 2026-27 में 6.6% की दर से होगी भर्ती
एक रिपोर्ट के अनुसार सेमीकंडक्टर और क्लीन एनर्जी क्षेत्र में बंपर अवसर। वेतन में 9.4% तक की वृद्धि संभव है। समझे पूरी रिपोर्ट

आधुनिक फैक्ट्री में रोबोटिक आर्म और डिजिटल तकनीक का उपयोग
MEI sector job growth India 2026 : भारतीय अर्थव्यवस्था के आधारस्तंभ कहे जाने वाले मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर (एमईआई) सेक्टर में इस वक्त एक नई औद्योगिक क्रांति की आहट सुनाई दे रही है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे न केवल उत्साहजनक हैं बल्कि देश के युवाओं के लिए सुनहरे भविष्य का संकेत भी दे रहे हैं। टीमलीज सर्विसेज की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, इस सेक्टर में रोजगार की दर में 6.6 प्रतिशत की शुद्ध बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो पिछले साल के 5.5 प्रतिशत के मुकाबले एक बड़ी छलांग है। यह महज आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि भारत का औद्योगिक परिदृश्य अब रिकवरी के दौर को पीछे छोड़कर एक सशक्त विस्तार की राह पर चल पड़ा है।
इस रोजगार क्रांति के केंद्र में करीब 70 प्रतिशत ऐसी कंपनियां हैं, जो आने वाले समय में अपने कर्मचारियों की संख्या को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। टीमलीज सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बालासुब्रमण्यम ए. के अनुसार, सेमीकंडक्टर उद्योग, स्वच्छ ऊर्जा (क्लीन एनर्जी) और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग में हो रहे भारी निवेश ने इस पूरे सेक्टर की तस्वीर बदल दी है। विशेष रूप से गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में होने वाला निवेश एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है। अनुमान है कि 2026 से 2028 के बीच केवल इसी क्षेत्र से लगभग 10 लाख नई नौकरियों का सृजन होगा, जो फैब्रिकेशन से लेकर चिप डिजाइन और सप्लाई चेन तक फैली होंगी।
सरकार की दूरगामी नीतियां जैसे नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने इस विकास को नई गति दी है। इसके साथ ही 'इंडस्ट्री 4.0' के बढ़ते प्रभाव ने कार्यस्थलों की मांग को भी बदल दिया है। अब कंपनियों को ऐसे पेशेवरों की तलाश है जो डिजिटल रूप से साक्षर हों और जिनके पास उच्च तकनीकी कौशल हो। वर्तमान में प्लांट ऑपरेशन, इंजीनियरिंग डिजाइन, ऑटोमेशन और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े पदों पर मांग अपने चरम पर है। सर्वे में शामिल 1,268 नियोक्ताओं की राय बताती है कि इंजीनियरिंग क्षेत्र की 33 प्रतिशत कंपनियां अपनी टीम का विस्तार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
भौगोलिक दृष्टि से देखें तो दक्षिण भारत का 'डेट्रॉयट' कहा जाने वाला चेन्नई इस दौड़ में सबसे आगे है, जहां भर्ती दर में 24 प्रतिशत तक की वृद्धि की संभावना है। पुणे और बेंगलुरु भी क्रमशः 20 और 18 प्रतिशत की दर के साथ इस सूची में शीर्ष पर बने हुए हैं। पुणे का मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च हब होना वहां के युवाओं के लिए नए द्वार खोल रहा है। इन राज्यों के अलावा महाराष्ट्र और गुजरात भी ऑटोमोबाइल और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के माध्यम से रोजगार के नए मानक स्थापित कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे आकर्षक पहलू सैलरी में होने वाली संभावित वृद्धि है। रिपोर्ट का दावा है कि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान एमईआई सेक्टर के कर्मचारियों की आय में 9.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है, जो कि आईटी और बैंकिंग जैसे स्थापित क्षेत्रों को भी पीछे छोड़ देगी। चेन्नई और पुणे जैसे शहरों में यह आंकड़ा 9.8 प्रतिशत तक जा सकता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
