नई दिल्ली: वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का सीधा असर अब भारत की आर्थिक ढाल यानी विदेशी मुद्रा भंडार पर दिखने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध ने भारतीय मुद्रा की स्थिरता को बनाए रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को बाजार में कड़ा हस्तक्षेप करने पर मजबूर कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप भारत की शुद्ध विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में निरंतर कमी आ रही है।

रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों का विश्लेषण करें तो भारत का हेडलाइन विदेशी मुद्रा भंडार फिलहाल $688.058 बिलियन के साथ एक आरामदायक स्थिति में प्रतीत होता है। हालांकि, यह चमक मुख्य रूप से सोने की कीमतों में आई भारी उछाल के कारण है। यदि स्वर्ण भंडार के मूल्यांकन (Appreciation) को हटा दिया जाए, तो भंडार का असली घटक यानी विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति (FCA) बीते दो वर्षों से लगातार घट रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान एफसीए में लगभग $14 बिलियन की गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले वित्त वर्ष में हुई $5.6 बिलियन की कमी से काफी अधिक है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार में यह गिरावट अस्थायी नहीं है। बंधन एएमसी के सीनियर इकोनॉमिस्ट श्रीजीत बालासुब्रमण्यम की रिपोर्ट के अनुसार, स्वर्ण भंडार की वैल्यू बढ़ने से हेडलाइन नंबर भले ही ऊपर दिखें, लेकिन एफसीए की हिस्सेदारी में 8 प्रतिशत अंकों की गिरावट आई है। संकट तब और गहरा जाता है जब हम आरबीआई की फॉरवर्ड बुक पर नजर डालते हैं। पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण रुपये की गिरावट रोकने के लिए रिजर्व बैंक को बड़ी मात्रा में डॉलर बाजार में छोड़ने पड़े हैं। अनुमान है कि फॉरवर्ड बुक में नेट शॉर्ट पोजीशन मार्च तक $100 बिलियन तक पहुंच गई है।

वर्तमान भंडार 11 महीनों के आयात बिल को कवर करने के लिए पर्याप्त है, लेकिन फॉरवर्ड लायबिलिटीज को जोड़ने पर यह कवर घटकर मात्र नौ महीने का रह जाता है। यदि वैश्विक तनाव कम नहीं होता और डॉलर की मजबूती इसी तरह जारी रहती है, तो आने वाले समय में रिजर्व बैंक को 'ओपन मार्केट ऑपरेशंस' के जरिए और अधिक विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ सकती है। यह स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सतर्क संदेश है, क्योंकि लगातार कम होता शुद्ध भंडार भविष्य के आर्थिक झटकों को सहने की क्षमता को सीमित कर सकता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story