मत्स्य क्षेत्र में Blue Revolution का आगाज ; क्या PM Matsya Sampada Yojana से मछुआरों की बदल सकती है तस्वीर?
भारतीय मत्स्य क्षेत्र में रिकॉर्ड ₹2,761.80 करोड़ का निवेश और डिजिटल क्रांति। उत्पादन में 106% की वृद्धि के साथ भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक।

भारत सरकार के मत्स्य पालन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 2015 से 2025 तक नीली क्रांति और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत हुए विकास कार्यों का विवरण।
Union Budget 2026-27 Fisheries Allocation : भारत के नीले क्षितिज पर आर्थिक समृद्धि की एक नई इबारत लिखी जा रही है। देश का मत्स्य पालन क्षेत्र आज न केवल भोजन की थाली का हिस्सा है, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था के एक शक्तिशाली इंजन के रूप में उभरकर सामने आया है। केंद्र सरकार की दूरगामी नीतियों और रिकॉर्ड तोड़ निवेश ने इस पारंपरिक व्यवसाय को एक आधुनिक उद्योग में तब्दील कर दिया है, जिससे देश के लाखों मछुआरों के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा का समावेश हुआ है।
इस विकास यात्रा की गंभीरता का अंदाजा केंद्रीय बजट 2026-27 के प्रावधानों से लगाया जा सकता है, जिसमें इस क्षेत्र के लिए अब तक का सबसे ऐतिहासिक आवंटन किया गया है। कुल 2,761.80 करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम बजट में से लगभग 2,500 करोड़ रुपये अकेले 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' (PMMSY) को समर्पित किए गए हैं। यह आवंटन स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार इस क्षेत्र को वैश्विक मानचित्र पर शीर्ष पर देखने के लिए संकल्पबद्ध है। वर्तमान में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन गया है, जो वैश्विक उत्पादन में 8% की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है। आंकड़ों की बाजीगरी से परे, यह वृद्धि वास्तविकता के धरातल पर भी उतनी ही प्रभावशाली है। वर्ष 2013-14 में जहां उत्पादन मात्र 95.79 लाख टन था, वह 2024-25 तक 106% की छलांग लगाते हुए 197.75 लाख टन के जादुई आंकड़े तक पहुंच गया है।
आधुनिकीकरण के इस दौर में समुद्री उत्पादों के निर्यात ने 62,408 करोड़ रुपये की नई ऊंचाइयों को छुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की पैठ और अधिक गहरी हुई है। सरकार ने केवल उत्पादन बढ़ाने पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया, बल्कि फिशिंग हार्बर, अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण को प्राथमिकता दी है। 'ब्लू रिवोल्यूशन' की परिकल्पना को साकार करने के लिए बायो-फ्लॉक और रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) जैसी उन्नत तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है। ये तकनीकें कम पानी और सीमित स्थान में अधिक पैदावार सुनिश्चित कर रही हैं, जिसके तहत देशभर में हजारों नई इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं।
मछुआरा समुदाय की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को इस पूरी योजना के केंद्र में रखा गया है। 'नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म' के माध्यम से करीब 30 लाख लोगों को एक एकीकृत डिजिटल नेटवर्क से जोड़कर बैंकिंग, बीमा और सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच को सुगम बनाया गया है। अब तक 33 लाख लोगों को बीमा कवर और 4.39 लाख मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा प्रदान की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, 'अमृत सरोवर मिशन' जैसे अभियानों ने स्थानीय जलाशयों को मत्स्य पालन के नए केंद्रों में बदल दिया है, जिससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अभूतपूर्व अवसर पैदा हुए हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के तहत मंजूर किए गए 6,685 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स इस क्षेत्र की भविष्य की संभावनाओं को और अधिक ठोस आधार प्रदान कर रहे हैं। भारत का यह बढ़ता 'नीला प्रभाव' न केवल खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि समावेशी विकास की दिशा में एक सशक्त उदाहरण पेश कर रहा है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
