India-EU FTA: बड़ी ट्रेड डील के मुहाने पर भारत; लेकिन इन दो सेक्टर्स के लिए बढ़ी टेंशन
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच ऐतिहासिक 'मदर ऑफ ऑल डील्स' संपन्न। 110% से घटकर 10% हुई विदेशी कारों पर ड्यूटी, वाइन और स्पिरिट्स भी होंगे सस्ते। टाटा, महिंद्रा और घरेलू शराब कंपनियों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा की शुरुआत। सीफूड और फुटवियर एक्सपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा। जानें, इस मेगा ट्रेड डील से आपके बजट और शेयर बाजार पर क्या असर पड़ेगा।

India-EU FTA : वैश्विक कूटनीति और अर्थशास्त्र के पटल पर मंगलवार का दिन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ। लंबे इंतजार और जटिल वार्ताओं के दौर के बाद, भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आखिरकार अपने महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दे दिया है। 'मदर ऑफ ऑल डील्स' के रूप में चर्चित यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया अमेरिका के सख्त टैरिफ, चरमराई सप्लाई चेन और रूस-यूक्रेन युद्ध के भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही है। जहाँ यह डील भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सस्ते उत्पादों के द्वार खोलेगी, वहीं इसने घरेलू ऑटोमोबाइल और लिकर (शराब) सेक्टर के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
- उपभोक्ताओं की लॉटरी: लग्जरी कारें और वाइन होगी सस्ती इस समझौते के तहत भारत ने यूरोपीय आयात पर अपने द्वार खोल दिए हैं। सबसे बड़ा असर विलासितापूर्ण वस्तुओं पर पड़ेगा:
- ऑटोमोबाइल: यूरोपीय कारों पर लगने वाले भारी-भरकम 110% टैरिफ को घटाकर महज 10% कर दिया गया है। इससे मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी कारें अब भारतीय मध्यम वर्ग की पहुंच के करीब आएंगी।
- शराब और बेवरेजेस: वाइन पर ड्यूटी को 150% से घटाकर 20% और स्पिरिट्स पर 40% कर दिया गया है। जैतून का तेल, कीवी और भेड़ के मांस जैसे प्रीमियम खाद्य उत्पाद भी अब सस्ते मिलेंगे।
- औद्योगिक लाभ: मैन्युफैक्चरर्स के लिए मशीनरी, मेडिकल डिवाइस और फार्मास्यूटिकल्स रसायनों के आयात की लागत कम होगी, जिससे घरेलू उत्पादन की दक्षता बढ़ने की उम्मीद है।
स्वदेशी दिग्गजों के लिए खतरे की घंटी: गिरते शेयर और कड़ी प्रतिस्पर्धा सिक्के का दूसरा पहलू भारतीय कंपनियों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण है। जैसे ही समझौते की शर्तें सार्वजनिक हुईं, भारतीय शेयर बाजार में हलचल मच गई:
- शराब कंपनियां: टैरिफ कटौती से सुला वाइनयार्ड्स, यूनाइटेड ब्रुअरीज और रेडिको खेतान जैसी कंपनियों के बाजार प्रभुत्व को विदेशी ब्रांड्स से सीधा खतरा पैदा हो गया है, जिसके चलते इनके शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
- ऑटोमेकर्स: महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के लिए राह अब मुश्किल होने वाली है। 10% ड्यूटी के साथ यूरोपीय कारें भारतीय निर्माताओं को कड़ी टक्कर देंगी, जिससे घरेलू पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी ऊंचा हो जाएगा।
निर्यात का नया आसमान: भारतीय सीफूड और फुटवियर को मजबूती भारत के लिए यह डील केवल आयात तक सीमित नहीं है। यूरोपीय संघ भारत से होने वाले 99.5% एक्सपोर्ट पर ड्यूटी कम करेगा। इससे भारतीय सीफूड, फुटवियर और टेक्सटाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को यूरोपीय बाजारों में एक बड़ा प्लेटफॉर्म मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का एक वैकल्पिक और मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
