वैश्विक आर्थिक मंच पर अपनी रणनीतिक सूझबूझ का लोहा मनवाते हुए भारत ने कनाडा के साथ प्रस्तावित व्यापारिक समझौते की दिशा में एक बेहद व्यावहारिक और सुरक्षित मार्ग चुना है। भारत और कनाडा ने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को लेकर जारी वार्ता में एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। दोनों देशों ने सहमति जताई है कि इस महा-समझौते को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के लिए उन क्षेत्रों पर पहले ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां आपसी सहमति आसानी से बन सकती है, जबकि देश के घरेलू बाजार और किसानों से जुड़े बेहद संवेदनशील क्षेत्रों को फिलहाल इस पूरी प्रक्रिया से पूरी तरह अलग रखा जाएगा।

कनाडा की आधिकारिक यात्रा पर गए भारत के केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस द्विपक्षीय वार्ता के रुख को पूरी तरह से व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी बताया है। इस समय ओटावा में दोनों देशों के बीच तीसरे दौर की उच्चस्तरीय वार्ता जारी है। इस वार्ता के मुख्य उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए केंद्रीय मंत्री ने एक व्यापारिक कार्यक्रम में कहा कि जिन रणनीतिक या घरेलू मुद्दों को लेकर किसी भी पक्ष को संवेदनशीलता है, उन्हें इस समझौते में जबरन शामिल करने पर बिल्कुल भी जोर नहीं दिया जाएगा। उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक व्यापार में बेहतर अवसरों की तलाश के चक्कर में सामने मौजूद अच्छे और सुलभ अवसरों को हाथ से नहीं गंवाया जा सकता। इसलिए रणनीति यही है कि आसान और तत्काल परिणाम देने वाले क्षेत्रों पर दोनों देश पहले एक राय बनाएं।

ऐतिहासिक रूप से भारत अपने घरेलू कृषि परिदृश्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले डेयरी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किसी भी विदेशी ताकत या देश को अपने बाजार तक अबाधित पहुंच देने से बचता रहा है। इस वार्ता में भी भारत ने अपने करोड़ों किसानों और दुग्ध उत्पादकों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए कड़ा रुख बरकरार रखा है। इस कूटनीतिक संतुलन के साथ दोनों देशों ने आगामी समय के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। वर्तमान में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 17 अरब डॉलर के स्तर पर है, जिसे आगामी वर्ष 2030 तक तीन गुना से अधिक बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक ले जाने का एक बड़ा सामूहिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दोनों ही पक्ष इस वर्ष के अंत तक इस व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रहे हैं।

अपनी इस कनाडाई यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने न केवल सरकारी प्रतिनिधियों के साथ कूटनीतिक संवाद किया, बल्कि उन्होंने कनाडा के दिग्गज उद्योगपतियों, बड़ी निवेश कंपनियों, वैश्विक पेंशन कोष और बीमा क्षेत्र के शीर्ष नीति-निर्माताओं के साथ भी अत्यंत महत्वपूर्ण बैठकें संपन्न कीं। भारतीय बाजार की ताकत को दुनिया के सामने रखते हुए उन्होंने कनाडाई कंपनियों को भारत में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश करने का खुला आमंत्रण दिया। उन्होंने वैश्विक समुदाय को आश्वस्त किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बौद्धिक संपदा अधिकारों के कड़े संरक्षण और एक सुरक्षित विधिक ढांचे के लिए जाना जाता है, जो किसी भी विदेशी निवेशक के लिए सबसे बड़ी गारंटी है।

वर्तमान में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, जहां लगभग 2.3 लाख पंजीकृत स्टार्टअप युवाओं के नेतृत्व में देश की तकदीर बदल रहे हैं। भारत की इस बढ़ती डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए वाणिज्य मंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन टेक्नोलॉजी, एग्री-टेक और डीप टेक्नोलॉजी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। इसी सिलसिले में उनकी ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान के मुख्य कार्यपालक अधिकारी जो टेलर और सीपीपी इन्वेस्टमेंट्स के प्रमुख जॉन ग्राहम के साथ अलग से विशेष बैठकें हुईं, जिनमें भारत के बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, वित्तीय सेवाओं, परिवहन और डिजिटल अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक कनाडाई निवेश को बड़े पैमाने पर आकर्षित करने के लिए ठोस और सकारात्मक चर्चा की गई।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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