Ethanol blending in ATF India 2026 : भारतीय विमानन क्षेत्र में एक युगांतकारी परिवर्तन की आहट सुनाई दे रही है, जो न केवल हवाई यात्रियों की जेब को राहत देगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगी। केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमानन ईंधन में इथेनॉल और अन्य सिंथेटिक हाइड्रोकार्बन के मिश्रण को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी इस नवीनतम अधिसूचना ने भारतीय आसमान में 'क्लीन एनर्जी' के एक नए युग का सूत्रपात कर दिया है। यह निर्णय भारत की उस महात्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है, जिसके तहत देश को विदेशी कच्चे तेल की निर्भरता से मुक्त कर आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

कानूनी और तकनीकी बारीकियों पर गौर करें तो सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत 'एविएशन टर्बाइन फ्यूल (मार्केटिंग का विनियमन) आदेश 2001' में व्यापक संशोधन किए हैं। इस बदलाव के जरिए एटीएफ की मार्केटिंग से जुड़े नियमों को अपडेट किया गया है और प्रवर्तन प्रावधानों को संशोधित आपराधिक प्रक्रियाओं के साथ एकीकृत किया गया है। नए नियमों के अनुसार, अब विमान ईंधन को IS 17081 जैसे कड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मिश्रित किया जा सकेगा। हालांकि, सरकार ने वर्तमान में ब्लेंडिंग के लिए कोई तत्काल अनिवार्य लक्ष्य या समय-सीमा निर्धारित नहीं की है, लेकिन नियमों में यह बदलाव भविष्य की तैयारियों के लिए एक मजबूत वैधानिक ढांचा प्रदान करता है।

इथेनॉल ब्लेंडिंग की यह पहल आर्थिक और पर्यावरणीय, दोनों मोर्चों पर क्रांतिकारी साबित होने वाली है। अब तक विमान पूरी तरह से पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भर थे, जिसकी भारी लागत विमानन कंपनियों और अंततः यात्रियों पर पड़ती थी। सिंथेटिक ईंधन के उपयोग से परिचालन खर्च में कमी आएगी, जिसका सीधा लाभ हवाई किराए में गिरावट के रूप में आम आदमी को मिलेगा। इसके अतिरिक्त, यह कदम भारत के 'नेट ज़ीरो' उत्सर्जन के संकल्प को मजबूती देगा, जिससे विमानों से होने वाले कार्बन फुटप्रिंट में भारी कमी आएगी।

इस योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू देश की अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र से जुड़ा है। वर्ष 2014 से अब तक पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण के माध्यम से भारत ने ₹1.63 लाख करोड़ से अधिक की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बचत की है। इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के शीरे, मक्का और खराब अनाज से होता है, जिससे सीधे तौर पर देश के अन्नदाताओं को लाभ पहुंच रहा है। अब तक किसानों को इसके बदले लगभग ₹1.43 लाख करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। निष्कर्षतः, विमानन ईंधन में इथेनॉल की एंट्री केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक सशक्त, हरित और किफायती भारत की दिशा में उड़ान भरने का नया संकल्प है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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