पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की 'तूफानी' छलांग; 6.1 गीगावाट की रिकॉर्ड वृद्धि के साथ बना ग्लोबल लीडर
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने पवन ऊर्जा क्षेत्र में 6.1 GW क्षमता जोड़कर वैश्विक स्तर पर चौथा स्थान हासिल किया और भविष्य के लिए नए लक्ष्य निर्धारित किए।

स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक हाइब्रिड प्रोजेक्ट के तहत खुले मैदान में स्थापित पवन चक्कियां और सोलर पैनल।
India Wind Energy Record 6.1 GW : भारत ने अक्षय ऊर्जा के वैश्विक मंच पर एक ऐसी स्वर्णिम इबारत लिख दी है, जिसने दुनिया के विकसित देशों को भी अचंभित कर दिया है। वित्त वर्ष 2025–26 में देश ने पवन ऊर्जा के क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक छलांग लगाते हुए 6.1 गीगावाट (GW) की अतिरिक्त क्षमता जोड़ने का ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस उपलब्धि को भारत के 'नेट-ज़ीरो' संकल्प की दिशा में एक मील का पत्थर करार देते हुए कहा कि यह तीव्र प्रगति न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि भारत को एक वैश्विक ऊर्जा शक्ति के रूप में भी स्थापित करती है। इस अभूतपूर्व वृद्धि के साथ ही भारत अब पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता के मामले में दुनिया भर में चौथे स्थान पर काबिज हो गया है, जहाँ वर्तमान में देश की कुल क्षमता 56.1 GW के प्रभावशाली आंकड़े को पार कर चुकी है।
पवन ऊर्जा की इस सफलता के पीछे सरकार की दूरगामी रणनीतियां और भौगोलिक संभावनाओं का सटीक आकलन प्रमुख कारक रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, 150 मीटर की हब ऊंचाई पर भारत की कुल पवन ऊर्जा क्षमता लगभग 1164 GW आंकी गई है, जो इस क्षेत्र में निवेश और विस्तार की असीमित गुंजाइश को प्रमाणित करती है। पवन ऊर्जा की सबसे बड़ी विशेषता इसका शाम और रात के समय सक्रिय होना है, जो सौर ऊर्जा के अभाव वाले घंटों में बिजली की पीक डिमांड को पूरा करने में सहायक सिद्ध होती है। आंकड़ों की मानें तो करीब 45 प्रतिशत पवन ऊर्जा उत्पादन उस समय होता है जब ग्रिड पर बिजली की मांग सबसे अधिक होती है, जिससे यह देश की ऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड स्थिरता के लिए एक अनिवार्य पूरक के रूप में उभरी है।
सरकार ने इस गति को बनाए रखने के लिए भविष्य के लक्ष्य भी अत्यंत महत्वाकांक्षी रखे हैं। केंद्र की योजना के अनुसार, वर्ष 2030 तक पवन ऊर्जा क्षमता को 100 GW और 2036 तक इसे 156 GW तक पहुँचाने का रोडमैप तैयार किया गया है। इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (RPO) में पवन ऊर्जा का विशेष प्रावधान, पारदर्शी बिडिंग प्रक्रिया और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसे ढांचागत सुधार किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 'मेक इन इंडिया' को बल देते हुए अब देश में 24 GW से अधिक वार्षिक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित हो चुकी है, जिसमें स्थानीयकरण का स्तर 70 से 80 प्रतिशत तक पहुँच गया है। यह आत्मनिर्भरता भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पवन ऊर्जा उपकरणों के एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में पेश कर रही है।
आगामी समय में भारत की रणनीति हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स और 'राउंड-द-क्लॉक' (RTC) बिजली आपूर्ति पर केंद्रित है, जहाँ पवन और सौर ऊर्जा के साथ स्टोरेज सिस्टम को जोड़कर अखंडित ऊर्जा प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा। निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कम लागत वाले वित्तपोषण और सीएफडी (CfD) जैसे मॉडल्स को अपनाया जा रहा है। कुल मिलाकर, भारत की यह उपलब्धि न केवल घरेलू स्तर पर ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रित करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध लड़ाई में भारत के नेतृत्व को और अधिक सशक्त बनाएगी। जिस गति से भारत हवाओं की इस शक्ति को समेट रहा है, वह दिन दूर नहीं जब यह देश दुनिया का सबसे बड़ा स्वच्छ ऊर्जा हब बनकर उभरेगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
