भारत में कर अनुपालन की प्रक्रिया को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में आयकर विभाग ने एक युगांतकारी कदम उठाया है। करदाताओं की जटिल समस्याओं का सरल समाधान प्रस्तुत करने के उद्देश्य से विभाग ने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस पर आधारित एक अत्याधुनिक चैटबॉट 'कर साथी' को सार्वजनिक पटल पर प्रस्तुत किया है। यह पहल न केवल आयकर विभाग के आधुनिकीकरण को दर्शाती है, बल्कि उन लाखों टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है जो अक्सर आईटीआर फाइलिंग की बारीकियों और तकनीकी शब्दावलियों के कारण उलझन में रहते थे। 'कर साथी' के माध्यम से अब सरकार सीधे करदाताओं के द्वार पर 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली सहायता प्रणाली सुनिश्चित कर रही है।

तकनीकी नवाचार के इस दौर में आयकर रिटर्न (ITR) भरने की प्रक्रिया को सुगम बनाना विभाग की प्राथमिकता रही है। 'कर साथी' चैटबॉट को इस प्रकार विकसित किया गया है कि यह करदाताओं द्वारा पूछे गए हर छोटे-बड़े सवाल का सटीक और त्वरित जवाब देने में सक्षम है। चाहे वह धारा 80सी के तहत मिलने वाली छूट की जानकारी हो या फॉर्म 16 से जुड़ी कोई जिज्ञासा, यह एआई-संचालित सहायक वास्तविक समय में संवाद स्थापित करता है। इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसकी उपलब्धता है; यह बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के दिन के 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन कार्य करता है, जिससे कार्यालयी समय की प्रतीक्षा करने की बाध्यता समाप्त हो जाती है।

सरकारी दिशानिर्देशों और आईटी नियमों के अनुकूल तैयार किया गया यह चैटबॉट डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के उच्चतम मानकों का पालन करता है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 'कर साथी' के पीछे का मुख्य उद्देश्य कर फाइलिंग के दौरान होने वाली त्रुटियों को कम करना और स्वैच्छिक कर अनुपालन को बढ़ावा देना है। अक्सर देखा गया है कि जानकारी के अभाव में करदाता अंतिम समय में गलतियां कर बैठते हैं, जिससे बाद में नोटिस और जुर्माने की स्थिति उत्पन्न होती है। अब इस डिजिटल साथी की मदद से यूजर अपनी फाइलिंग प्रक्रिया के दौरान ही संदेहों का निवारण कर सकेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और तनावमुक्त हो जाएगी।

आयकर विभाग का यह कदम भारत सरकार के 'डिजिटल इंडिया' विजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह चैटबॉट न केवल हिंदी और अंग्रेजी बल्कि अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी संवाद करने की क्षमता की ओर अग्रसर है, ताकि भाषाई अवरोधों के कारण कोई भी करदाता सहायता से वंचित न रहे। विभाग का मानना है कि 'कर साथी' के आने से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पर निर्भरता पूरी तरह खत्म तो नहीं होगी, लेकिन सामान्य करदाता अपने स्तर पर प्राथमिक समस्याओं को सुलझाने में सक्षम होंगे। अंततः, यह तकनीक कर प्रशासन और नागरिकों के बीच एक विश्वसनीय सेतु का कार्य करेगी, जो विकसित भारत की दिशा में एक प्रभावी आर्थिक सुधार है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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