क्या है IDBI Bank? विकास वित्त से वाणिज्यिक बैंकिंग तक की बदलती पहचान
1964 में विकास संस्थान के रूप में शुरू हुआ IDBI आज LIC और सरकार के स्वामित्व में एक प्रमुख वाणिज्यिक बैंक और वित्तीय स्तंभ बन चुका है।

भारतीय बैंकिंग परिदृश्य में IDBI Bank आज एक ऐसे संस्थान के रूप में स्थापित है, जिसने समय के साथ अपने स्वरूप और कार्यप्रणाली में व्यापक परिवर्तन करते हुए भरोसे और स्थिरता की नई पहचान बनाई है। लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) और भारत सरकार के स्वामित्व वाला यह बैंक वर्तमान में देश के बड़े वाणिज्यिक बैंकों में गिना जाता है। लगभग ₹4.11 लाख करोड़ के बैलेंस शीट आकार, 2100 से अधिक शाखाओं, 3700 से अधिक एटीएम, देशभर में फैले बैंकिंग आउटलेट्स और दुबई स्थित एक विदेशी शाखा के साथ यह बैंक खुदरा और कॉर्पोरेट बैंकिंग दोनों क्षेत्रों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराता है।
इस बैंक की शुरुआत 1964 में इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया के रूप में हुई थी, जब इसे भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था के रूप में स्थापित किया गया। उस समय इसका उद्देश्य देश के औद्योगिक विकास के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराना था। 1976 में इसका स्वामित्व भारत सरकार को स्थानांतरित किया गया, जिसके बाद यह देश के औद्योगिक वित्त पोषण का प्रमुख स्तंभ बन गया। हरित क्षेत्र की परियोजनाओं से लेकर उद्योगों के विस्तार, आधुनिकीकरण और विविधीकरण तक, IDBI ने विकास वित्त संस्थान के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण के बाद वित्तीय क्षेत्र में आए बदलावों के साथ IDBI ने भी अपनी रणनीति बदली। 2003 के कानून के तहत इसे एक कंपनी का दर्जा मिला और 2004 में यह अनुसूचित बैंक के रूप में मान्यता प्राप्त कर गया। 2005 में इसके वाणिज्यिक बैंकिंग अंग, IDBI Bank, का इसमें विलय हुआ, जिससे यह पूर्ण रूप से एक वाणिज्यिक बैंक में परिवर्तित हो गया। इसके बाद 2006 में यूनाइटेड वेस्टर्न बैंक के अधिग्रहण से इसकी शाखाओं का विस्तार दोगुना हो गया और खुदरा बैंकिंग में इसकी पहुंच बढ़ी।
हालांकि, 2018 के आसपास बैंक को उच्च एनपीए और पूंजी पर्याप्तता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसके चलते सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा। 2019 में LIC ने 51 प्रतिशत हिस्सेदारी लेकर बैंक का प्रबंधन अपने हाथ में लिया, जिसके बाद इसे नियामकीय दृष्टि से निजी क्षेत्र के बैंक के रूप में वर्गीकृत किया गया। यह कदम बैंक के पुनर्गठन और वित्तीय मजबूती की दिशा में निर्णायक साबित हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक के Prompt Corrective Action फ्रेमवर्क से 2021 में बाहर आना इसकी स्थिरता और सुधार का प्रमाण रहा।
IDBI Bank ने केवल बैंकिंग सेवाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि देश की वित्तीय संरचना के निर्माण में भी अहम योगदान दिया। SEBI, NSE, NSDL, EXIM Bank और SIDBI जैसे संस्थानों की स्थापना में इसकी भूमिका रही है। इसके अलावा, इसकी सहायक कंपनी IDBI Intech Ltd. बैंकिंग आईटी सेवाओं के क्षेत्र में सक्रिय है, जो तकनीकी नवाचार और डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देती है।
आज IDBI Bank अपनी विविध सेवाओं, मजबूत नेटवर्क और संस्थागत समर्थन के कारण ग्राहकों के बीच विश्वसनीयता का प्रतीक बन चुका है। बदलते आर्थिक परिवेश में खुद को ढालने की इसकी क्षमता और सरकारी व संस्थागत समर्थन ने इसे एक मजबूत और भरोसेमंद बैंक के रूप में स्थापित किया है।

Pratahkal Bureau
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