लगातार आसमान छूती कीमतों के बीच आई बड़ी भविष्यवाणी, इस साल बजट के दायरे में रहेगा सोना|
आईसीआईसीआई बैंक की ग्लोबल मार्केट्स रिपोर्ट के अनुसार इस साल घरेलू सोना दो लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर पार नहीं कर पाएगा।

नई दिल्ली के एक आभूषण शोरूम में सोने की कीमतों पर जारी आईसीआईसीआई बैंक की रिपोर्ट के संदर्भ में सोने के कंगन|
नई दिल्ली: घरेलू सर्राफा बाजार में पिछले कुछ समय से सोने की कीमतों में देखी जा रही रिकॉर्ड तोड़ तेजी को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा विश्लेषण सामने आया है। देश के प्रमुख निजी क्षेत्र के ऋणदाता, आईसीआईसीआई बैंक ने अपनी नवीनतम 'ग्लोबल मार्केट्स रिपोर्ट' जारी की है। इस विस्तृत रिपोर्ट में चालू वर्ष 2026 और आगामी वर्ष 2027 के लिए सोने की कीमतों का एक नया और संतुलित अनुमान पेश किया गया है। बैंक के आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस साल घरेलू बाजार में सोने की कीमतें दो लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार नहीं कर पाएंगी। हालांकि साल की शुरुआत में कीमतों ने एक नया इतिहास रचा था, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और आर्थिक बदलावों के कारण अब बाजार में स्थिरता की उम्मीद जताई जा रही है।
वैश्विक और घरेलू स्तर पर व्यापक उथल-पुथल के बीच भारतीय सर्राफा बाजार में सोने की चाल इस साल बेहद अप्रत्याशित रही है। साल की शुरुआत यानी जनवरी के महीने में सोना अपने उच्चतम स्तर के करीब पहुंचते हुए लगभग 1.90 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया था। इस अप्रत्याशित उछाल के बाद बाजार में मुनाफावसूली और वैश्विक समीकरणों के बदलने से कीमतों में क्रमिक गिरावट दर्ज की गई। वर्तमान में घरेलू बाजार में सोने का भाव लगभग 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। आईसीआईसीआई बैंक की यह नई रिपोर्ट उन निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका साबित हो सकती है जो भविष्य की कीमतों को लेकर अनिश्चितता की स्थिति में थे।
आईसीआईसीआई बैंक की ग्लोबल मार्केट्स रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के बचे हुए महीनों में भारतीय घरेलू बाजार में सोने की कीमतें 1,50,000 रुपये से लेकर 1,80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच सीमित दायरे में रहने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही, रिपोर्ट में मध्यम अवधि के दृष्टिकोण को भी शामिल किया गया है, जिसके तहत वर्ष 2027 में यह तेजी थोड़ा और आगे बढ़ सकती है। बैंक का अनुमान है कि अगले साल सोने का भाव 1,60,000 रुपये से लेकर 1,90,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू सकता है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की मजबूत मांग और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में देखी जा रही ऐतिहासिक कमजोरी इस बड़ी कीमतों को बनाए रखने के मुख्य कारक हैं।
आर्थिक विश्लेषकों ने इस साल अब तक दर्ज की गई लगभग 20 प्रतिशत की भारी तेजी के पीछे तीन मुख्य विनियामक और व्यापक आर्थिक कारकों को जिम्मेदार ठहराया है। सबसे पहला और प्रमुख कारण मुद्रा बाजार में रुपये की कमजोरी है; इस साल अब तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया करीब 7 प्रतिशत तक टूट चुका है, जिससे सोने का आयात सीधे तौर पर महंगा हो गया है। दूसरा बड़ा कानूनी और आधिकारिक पहलू भारत सरकार द्वारा लागू किया गया नया कर ढांचा है। सरकार ने 13 मई 2026 से सोने पर लगने वाले मूल आयात शुल्क (बेसिक कस्टम्स ड्यूटी) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 15 प्रतिशत कर दिया है। बाजार अभी भी इस अचानक हुई बढ़ोतरी के प्रभाव को पूरी तरह पचाने में लगा हुआ है, और जानकारों का मानना है कि इस शुल्क वृद्धि के कारण आने वाले दिनों में कीमतों में 2 से 3 प्रतिशत की और बढ़त देखने को मिल सकती है। तीसरा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की हाजिर कीमतों का लगातार मजबूत बने रहना है।
बैंक ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2026 के लिए लगाया गया यह मूल्य अनुमान पूरी तरह से कुछ तय आर्थिक मानकों पर आधारित है। इस पूर्वानुमान के तहत यह माना गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया औसतन 96 के स्तर पर बना रहेगा। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में सोने की औसत कीमत 4,700 डॉलर प्रति औंस रहने का आकलन किया गया है। वहीं, वर्ष 2027 के उन्नत अनुमानों के लिए भारतीय रुपये का औसत स्तर डॉलर के मुकाबले 96.50 माना गया है। इन आंकड़ों से साफ है कि घरेलू बाजार में सोने की कीमतें पूरी तरह से वैश्विक मुद्राओं और अंतरराष्ट्रीय सर्राफा दरों के समन्वय पर निर्भर करेंगी।
इस पूरी रिपोर्ट में भू-राजनीतिक तनावों और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों के प्रभाव का भी गहराई से उल्लेख किया गया है। वर्ष 2025 में 65 प्रतिशत की जबरदस्त और ऐतिहासिक वार्षिक तेजी दर्ज करने के बाद, वैश्विक बाजार में सोने ने वर्ष 2026 में अब तक लगभग 5 प्रतिशत की बढ़त बनाई है। हालांकि, 28 फरवरी 2026 को पश्चिम एशिया में शुरू हुए नए सैन्य संघर्ष और तनाव के बाद वैश्विक कीमतों में एक विपरीत सुधार देखा गया और वहां से कीमतों में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। इसके अलावा, रिपोर्ट ने निवेशकों को आगाह करते हुए एक तकनीकी चेतावनी भी दी है। यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए अपनी मौद्रिक नीतियों को अधिक सख्त करता है या नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला दोबारा शुरू करता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की तेजी की रफ्तार काफी धीमी पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में, वर्ष 2027 तक सोने की कीमतों का ग्राफ अनुमानित स्तर से थोड़ा नीचे या पूरी तरह सपाट रह सकता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
