Indian Sports Economy 2026 : भारतीय खेल जगत ने वाणिज्यिक इतिहास के पन्नों में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। पहली बार देश की खेल अर्थव्यवस्था ने 2 अरब डॉलर की जादुई सीमा को पार कर 2.13 अरब डॉलर (लगभग 18,864 करोड़ रुपये) का विशाल आकार ले लिया है। डब्ल्यूपीपी मीडिया की नवीनतम रिपोर्ट 'स्पोर्टिंग नेशन' के अनुसार, भारतीय खेल उद्योग ने पिछले चार वर्षों में अपनी ताकत को दोगुना कर लिया है, जो सालाना आधार पर 13.4% की प्रभावशाली वृद्धि को दर्शाता है। यह उछाल न केवल खेल के प्रति भारतीयों के जुनून को उजागर करता है, बल्कि भारत को वैश्विक खेल बाजार के एक शक्तिशाली केंद्र के रूप में भी स्थापित करता है।

क्रिकेट का 'विराट' दबदबा और उभरते खेलों की चुनौती :

बाजार के विश्लेषण में सबसे चौंकाने वाला तथ्य क्रिकेट का निर्विवाद वर्चस्व है। कुल खेल राजस्व में क्रिकेट की हिस्सेदारी बढ़कर 89% हो गई है, जो पिछले वर्ष 85% थी। दिलचस्प बात यह है कि अकेले क्रिकेट का बाजार (16,704 करोड़ रुपये) अब उतना बड़ा हो चुका है जितना कि 2024 में पूरा भारतीय खेल उद्योग था। इस विकास यात्रा में आईपीएल (IPL), महिला प्रीमियर लीग (WPL) और आईसीसी आयोजनों में भारत की जीत ने ईंधन का काम किया है। हालांकि, क्रिकेट की इस सुनामी के बीच अन्य उभरते खेलों (फुटबॉल, कबड्डी आदि) की हिस्सेदारी घटकर 11% रह गई है, जिसका एक मुख्य कारण इस वर्ष बड़े आयोजनों जैसे 'आईएसएल' के स्थगन को माना जा रहा है।

राजस्व के स्रोत और ब्रांड निवेश का नया दौर :

खेल अर्थव्यवस्था की इस मजबूती के पीछे तीन मुख्य स्तंभ हैं: मीडिया खर्च, प्रायोजन (Sponsorship) और एथलीट एंडोर्समेंट।

  • मीडिया खर्च : उद्योग का लगभग 50% हिस्सा (9,571 करोड़ रुपये) विज्ञापन और प्रसारण पर खर्च होता है, जिसमें क्रिकेट का हिस्सा 95% है।
  • प्रायोजन : यह दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है, जिसमें 7,943 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। अकेले आईपीएल टीमों का प्रायोजन शुल्क ही 1,000 करोड़ रुपये के पार निकल चुका है।
  • सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट : विज्ञापनों में खिलाड़ियों की मौजूदगी पर 1,350 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

डब्ल्यूपीपी मीडिया के प्रबंध निदेशक विनीत कर्णिक के अनुसार, अब ब्रांड केवल लोगो दिखाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे खेल की कहानी का हिस्सा बन रहे हैं। यह 'दृश्यता' से 'गहन जुड़ाव' की ओर एक बड़ा बदलाव है। सोशल मीडिया की दुनिया में भी क्रिकेटरों का प्रभाव अन्य एथलीटों की तुलना में कहीं अधिक है। जहां विराट कोहली और रोहित शर्मा के चर्चे करोड़ों में हैं, वहीं गैर-क्रिकेट वर्ग में नीरज चोपड़ा और सुनील छेत्री जैसे नाम अपनी पहचान बना रहे हैं। आईसीसी के सीईओ संजोग गुप्ता का मानना है कि भारत अब विश्व क्रिकेट का 'मुख्य बाजार' है। घरेलू मैदान पर महिला विश्व कप जैसे आयोजनों की सफलता ने एक नए और विशाल बाजार के द्वार खोल दिए हैं, जिससे आने वाले समय में इस अर्थव्यवस्था के और अधिक विस्तार की उम्मीद है। यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत में खेल अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली आर्थिक शक्ति बन चुका है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story