मुंबई के धातु बाजार में भारी उथल-पुथल: तांबे और निकल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट, निवेशकों में मची खलबली
मुंबई धातु बाजार में 23 जनवरी 2026 को तांबे, एल्युमीनियम और निकल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। निकल कैथोड के दाम 4957 रुपये से गिरकर 4742 रुपये पर आ गए, जिससे व्यापारियों में हड़कंप मच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार (LME) के दबाव और स्टॉक में बदलाव के बीच मुंबई के मेटल और स्क्रैप मार्केट की पूरी विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें।

मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के मेटल मार्केट में आज हलचल का माहौल देखा गया, जहाँ तांबे से लेकर निकल तक की कीमतों में आए अप्रत्याशित बदलाव ने व्यापारियों और निवेशकों को हैरत में डाल दिया है। 23 जनवरी 2026 की तारीख बाजार के इतिहास में एक बड़े उतार-चढ़ाव के रूप में दर्ज की गई है, जहाँ एक ओर तांबा और एल्युमीनियम के दाम गिरे हैं, वहीं दूसरी ओर निकल के भाव में आई भारी गिरावट ने बाजार के समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया है। घरेलू बाजार से लेकर लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) तक, हर जगह कीमतों का ग्राफ नीचे की ओर झुकता नजर आ रहा है।
बाजार से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुंबई के हाजिर बाजार में 'कॉपर वायर बार' (Copper Wire Bar) की कीमत पिछले बंद भाव 1257 रुपये से गिरकर 1254 रुपये प्रति किलो पर आ गई है। इसी तरह 'एल्युमीनियम इनगट' (Aluminum Ingot) भी 321 रुपये से घटकर 319 रुपये पर सिमट गया। हालांकि, सबसे चौंकाने वाली गिरावट 'निकल कैथोड' (Nickel Cathode) में देखी गई, जो पिछले सत्र के 4957 रुपये के मुकाबले धड़ाम से गिरकर 4742 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया। इस भारी गिरावट ने औद्योगिक क्षेत्र में चिंता की लहर पैदा कर दी है, क्योंकि निकल का उपयोग स्टेनलेस स्टील और बैटरी निर्माण जैसे प्रमुख उद्योगों में व्यापक रूप से होता है।
स्क्रैप मार्केट यानी कबाड़ बाजार की स्थिति भी कुछ अलग नहीं रही। 'कॉपर केबल स्क्रैप' (Copper Cable Scrap) और 'कॉपर हैवी स्क्रैप' (Copper Heavy Scrap) की कीमतों में भी तीन-तीन रुपये की नरमी दर्ज की गई, जो क्रमशः 1190 रुपये और 1180 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रहे हैं। हालांकि 'कॉपर आर्मेचर' (Copper Armature) 1169 रुपये पर स्थिर बना हुआ है, लेकिन 'तांबा बर्तन' (Copper Utensil) और 'ब्रास शीट कटिंग' (Brass Sheet Cuttings) जैसे सेगमेंट में कीमतों में हल्की गिरावट ने छोटे व्यापारियों के मुनाफे पर असर डाला है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर डालें तो लंदन मेटल मार्केट (LME) से मिल रहे संकेत भी काफी दबाव भरे हैं। वहां कॉपर की कीमतें 13000 डॉलर के स्तर पर हैं, जबकि स्टॉक में 3450 टन की बढ़ोतरी देखी गई है। इसके विपरीत, एल्युमीनियम और जिंक के स्टॉक में क्रमशः 2000 टन और 3250 टन की भारी कमी आई है, जो भविष्य में आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले संकट की ओर इशारा कर रही है। वैश्विक बाजार में निकल की कीमत 18725 डॉलर के स्तर पर देखी गई, जिसमें स्टॉक की स्थिति भी घटती हुई दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई के बाजारों में यह अस्थिरता अंतरराष्ट्रीय मांग में कमी और स्टॉक की बदलती स्थिति के कारण है। जिस तरह से प्रमुख धातुओं की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है, उसने निर्माण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत को तो प्रभावित किया ही है, साथ ही मेटल ट्रेडिंग से जुड़े हजारों परिवारों की नजरें अब आने वाले हफ्तों के बाजार रुख पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगले कारोबारी सत्र में बाजार अपनी खोई हुई चमक वापस पा सकेगा या मंदी का यह दौर अभी और गहराएगा।

Pratahkal Bureau
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