Health Budget 2026 : क्या बीमार सिस्टम को मिलेगी संजीवनी? एक्सपर्ट्स ने की जीडीपी के 2.5% आवंटन की मांग!
केंद्रीय बजट 2026-27 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ी घोषणाओं की उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर जीडीपी के मुकाबले कम खर्च और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियों के बीच, विशेषज्ञ दवाओं पर GST हटाने और स्वास्थ्य बजट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। जानें अमेरिका, चीन और जापान के मुकाबले भारत का हेल्थ बजट कहाँ खड़ा है और इस बार विशेषज्ञों की वित्त मंत्री से क्या हैं प्रमुख मांगें।

Union Budget 2026 : जैसे-जैसे 1 फरवरी की तारीख नजदीक आ रही है, देश की निगाहें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पिटारे पर टिक गई हैं। वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के 'स्वास्थ्य के अधिकार' की दिशा तय करने वाला दस्तावेज साबित होने वाला है। विकसित देशों की तुलना में भारत का स्वास्थ्य बजट आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, और विशेषज्ञों का मानना है कि 'विकसित भारत' का सपना बिना मजबूत मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के अधूरा है।
वैश्विक परिदृश्य: कहाँ खड़ा है भारत ?
विश्व बैंक की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, स्वास्थ्य पर खर्च के मामले में भारत और विकसित देशों के बीच एक गहरी खाई मौजूद है। जहाँ अमेरिका अपनी जीडीपी का लगभग 17-18 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करता है, वहीं भारत का आंकड़ा अभी भी 3 से 4 प्रतिशत के आसपास ही सिमटा हुआ है।
| अनु. क्रमांक | देश | जीडीपी खर्च (%) | प्रति व्यक्ति खर्च (USD) |
| १. | अमेरिका | 16.8% | $12,000 |
| २. | जापान | 11.0% | $4,150 |
| ३. | रूस | 5.3% | $1,474 |
| ४. | चीन | 5.0% | $731 |
| ५. | भारत | 3.6% | $209 |
बजट का इतिहास और सुधार की सुगबुगाहट :
पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने डिजिटल हेल्थ और सस्ती दवाओं (जन औषधि) पर ध्यान केंद्रित किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में स्वास्थ्य मंत्रालय को 1 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 11% की वृद्धि थी।
पिछले चार वर्षों का बजट रुझान :
- 2022-23: ₹86,606 करोड़
- 2023-24: ₹88,956 करोड़
- 2024-25: ₹90,000 करोड़
- 2025-26: ₹99,858 करोड़
एक्सपर्ट पैनल: क्या हैं प्रमुख मांगें ?
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. शरद अग्रवाल सहित कई विशेषज्ञों ने सरकार के समक्ष कड़े सुझाव रखे हैं। विशेषज्ञों का तर्क है कि बजट का आवंटन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी गुणवत्ता पर आधारित होना चाहिए।
- टैक्स में छूट: दवाओं, सर्जिकल उत्पादों और मेडिकल इक्विपमेंट को GST के दायरे से बाहर रखने की मांग की गई है ताकि इलाज सस्ता हो सके।
- इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता: कोविड काल में लगाए गए वेंटिलेटर्स की खराब गुणवत्ता का हवाला देते हुए विशेषज्ञों ने मांग की है कि एक स्वतंत्र संस्था स्वास्थ्य उपकरणों की खरीद और गुणवत्ता की निगरानी करे।
- हेल्थ इंश्योरेंस: जीवन बीमा की तर्ज पर स्वास्थ्य बीमा को अतिरिक्त आयकर छूट (Income Tax Rebate) के दायरे में लाने का सुझाव दिया गया है।
- ग्रामीण विस्तार: टियर-2 और टियर-3 शहरों में ऑक्सीजन प्लांट, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और वेंटिलेटर्स की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
