बाजार में उथल-पुथल: सेंसेक्स और निफ्टी की सुस्त चाल

पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। वैश्विक स्तर पर ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई उछाल ने घरेलू निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बीते सप्ताह बीएसई (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 30.96 अंक या 0.04 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 36.6 अंक यानी 0.15 प्रतिशत तक टूट गया। इस सुस्ती का सबसे बड़ा असर देश की दिग्गज कंपनियों के बाजार मूल्यांकन (Market Cap) पर पड़ा है।

एक इस्तीफे ने हिला दिया HDFC बैंक का साम्राज्य

पिछले हफ्ते की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर देश के सबसे बड़े निजी बैंक, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) से आई। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे ने निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया।

इस इस्तीफे का असर इतना गहरा था कि गुरुवार को कारोबार के दौरान बैंक का शेयर करीब 9 फीसदी तक गिर गया था। एक समय तो बैंक के मार्केट कैप में ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा की कमी आ गई थी। हालांकि, बाजार बंद होने तक स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ और शेयर 5 फीसदी की गिरावट पर टिका। पूरे सप्ताह के दौरान एचडीएफसी बैंक का कुल मूल्यांकन ₹56,124.48 करोड़ घटकर ₹12,01,267.28 करोड़ रह गया।

5 कंपनियों के ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा 'स्वाहा'

सेंसेक्स की टॉप 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से 5 के लिए पिछला हफ्ता किसी बुरे सपने से कम नहीं था। इन पांच कंपनियों का कुल मार्केट कैप सामूहिक रूप से ₹1,02,771.87 करोड़ कम हो गया। नुकसान झेलने वाली कंपनियों की सूची इस प्रकार है:

  • एचडीएफसी बैंक: ₹56,124.48 करोड़ का नुकसान (सबसे ज्यादा)।
  • आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank): बैंकिंग सेक्टर के दबाव के कारण मूल्यांकन में कमी।
  • टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS): आईटी सेक्टर में मुनाफावसूली का असर।
  • बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance): निवेशकों की बिकवाली के कारण गिरावट।
  • हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL): उपभोग मांग में सुस्ती के डर से मार्केट कैप घटा।

कौन रहा फायदे में? (The Gainers)

बाजार की इस गिरावट के बीच कुछ ऐसी भी दिग्गज कंपनियां रहीं, जिन्होंने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा और अपनी हैसियत में इजाफा किया। रिलायंस से लेकर एसबीआई तक, इन पांच कंपनियों ने अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाई:

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL): ऊर्जा क्षेत्र में मजबूती के कारण मूल्यांकन बढ़ा।
  • भारती एयरटेल: टेलीकॉम सेक्टर में बेहतर प्रदर्शन।
  • भारतीय स्टेट बैंक (SBI): सरकारी बैंक होने के नाते निवेशकों का सुरक्षित विकल्प बना।
  • इन्फोसिस (Infosys): आईटी में चुनिंदा खरीदारी से फायदा।
  • भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC): निवेशकों के निवेश के चलते मार्केट कैप में वृद्धि।


बाजार में गिरावट की मुख्य वजहें

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस उथल-पुथल के पीछे तीन प्रमुख कारण रहे:

  • ईरान युद्ध का असर: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत जैसे तेल आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाला है, जिससे शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ी।
  • बैंकिंग सेक्टर में अनिश्चितता: एचडीएफसी बैंक जैसे बड़े खिलाड़ी में आंतरिक बदलावों (इस्तीफे) ने पूरे बैंकिंग इंडेक्स को नीचे खींच लिया।
  • विदेशी निवेशकों की बिकवाली: वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से पैसे निकालने को प्राथमिकता दी।


एचडीएफसी बैंक के लिए यह हफ्ता काफी चुनौतीपूर्ण रहा। एक वरिष्ठ अधिकारी के इस्तीफे ने बैंक की मार्केट वैल्यू को हिलाकर रख दिया। हालांकि, रिलायंस और एसबीआई जैसी कंपनियों ने बाजार को पूरी तरह धराशायी होने से बचा लिया। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे अस्थिर बाजार में कोई भी कदम उठाने से पहले कंपनी की वित्तीय सेहत और विशेषज्ञ की राय जरूर लें।

डिस्क्लेमर: यह खबर केवल सामान्य जानकारी है, वित्तीय सलाह नहीं; बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिमों को देखते हुए निवेश का निर्णय अपने सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह पर ही लें।

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