हरदीप पुरी ने गिनाया 1,00,000 करोड़ का नुकसान; जानें क्या अब और बढ़ेंगे ईंधन के दाम?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन ₹1,000 करोड़ और इस तिमाही में ₹1 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश में तेल कंपनियों को हो रहे आर्थिक नुकसान के आंकड़े साझा करते हुए।
PM Modi appeal fuel saving 2026 : वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के बीच भारत एक गंभीर आर्थिक चुनौती के मुहाने पर खड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने और अनावश्यक खर्चों को कम करने की की गई अपील महज एक सामान्य सुझाव नहीं, बल्कि एक गहरे संकट की आधिकारिक चेतावनी है। इस अपील की गंभीरता उस वक्त और बढ़ गई जब केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए खुलासा किया कि देश की सरकारी तेल कंपनियां इस समय प्रतिदिन ₹1,000 करोड़ का भारी नुकसान झेल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और घरेलू बाजार में स्थिर दामों के बीच पैदा हुआ यह अंतर इस तिमाही में तेल कंपनियों के कुल घाटे को ₹1,00,000 करोड़ के खतरनाक स्तर तक ले जा सकता है, जो भारतीय बैंकिंग प्रणाली और विदेशी मुद्रा भंडार के लिए खतरे की घंटी है।
इस संकट की गहराई को समझाते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होने के बावजूद, सरकार आम जनता को महंगाई की मार से बचाने के लिए पुरानी कीमतों पर ही आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है। हालांकि सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर राहत देने का प्रयास किया है, जिससे सरकारी खजाने को प्रतिमाह ₹14,000 करोड़ का सीधा झटका लग रहा है, लेकिन तेल कंपनियों की 'अंडर-रिकवरी' यानी लागत और बिक्री के बीच का अंतर अब ₹2,00,000 करोड़ के पार जाने की कगार पर है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत तेल आयात करता है, ऐसे में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाला कोई भी व्यवधान सीधे तौर पर देश की आर्थिक बुनियाद को हिलाने की क्षमता रखता है।
सरकार के इस कदम को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। गृहमंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री की इस अपील को 'आत्मनिर्भर भारत' और 'एनर्जी सिक्योरिटी' के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप करार दिया है। उन्होंने वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने और प्राकृतिक खेती को अपनाने के सुझावों को वैश्विक चुनौतियों के बीच देश को स्थिर रखने का निर्णायक सूत्र बताया है। वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध को इस संकट का मुख्य कारण बताते हुए सचेत किया कि यदि जनता ने ईंधन के उपयोग में संयम नहीं बरता, तो भविष्य में बड़ी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी इसे देश के आर्थिक विकास और 'मेक इन इंडिया' की मजबूती के लिए एक आवश्यक कदम बताया है।
प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में इस अपील का व्यापक असर देखने को मिल रहा है, जहां स्थानीय नागरिकों ने इसे 'आर्थिक देशभक्ति' और 'काशी का संकल्प' मानकर अपनाने की ठानी है। जानकारों का मानना है कि सरकार सीधे तौर पर कीमतें बढ़ाकर जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय ऊर्जा संरक्षण को एक जन आंदोलन में बदलना चाहती है। हालांकि, यदि खपत में अपेक्षित कमी नहीं आई और घाटा इसी गति से बढ़ता रहा, तो आने वाले समय में सरकार को कड़े और कड़वे आर्थिक फैसले लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। अंततः, यह संकट हर भारतीय नागरिक की जागरूकता और जिम्मेदारी का परीक्षण है, जहां तेल की एक-एक बूंद की बचत देश की आर्थिक संप्रभुता को अक्षुण्ण रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
