भारतीय सर्राफा बाजार और वायदा बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। वैश्विक बाजार से मिल रहे मिश्रित संकेतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सोने और चांदी के दामों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज पर जहां दिनभर की स्थिरता के बाद देर रात कीमतें अचानक धड़ाम हो गईं, वहीं स्थानीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी के रुख में एक अलग विरोधाभास देखने को मिला। औद्योगिक मांग में आई अचानक कमी के चलते चांदी की कीमतों में जहां एक बड़ी गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय बाजार में सोने की हाजिर कीमतों में मजबूती का रुख बना रहा। इस उथल-पुथल ने देश के प्रमुख शहरों के आभूषण निर्माताओं और खुदरा खरीदारों दोनों को सतर्क कर दिया है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के स्थानीय सर्राफा बाजार में शुद्ध सोने की कीमतों में तेजी का रुख रहा। सोमवार के बंद स्तर के मुकाबले निन्यानवे दशमलव नौ प्रतिशत शुद्धता वाला सोना आठ सौ रुपये की बढ़त के साथ एक लाख तिरेसठ हजार छह सौ रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। इस स्थानीय बढ़त के विपरीत, कमजोर औद्योगिक मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी के दबाव के कारण चांदी की हाजिर कीमतें पांच हजार रुपये प्रति किलोग्राम की भारी कटौती के साथ दो लाख कहत्तर हजार रुपये के स्तर पर बंद हुईं। स्थानीय डीलरों का मानना है कि खुदरा बाजारों में खरीदारों की धारणा इस समय वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से प्रभावित हो रही है।

वायदा बाजार यानी मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज की बात करें तो वहां रात के सत्र में दोनों ही धातुओं में बड़ी गिरावट देखी गई। जून डिलीवरी वाले सोने का सौदा दो सौ बासठ रुपये की कमजोरी के साथ एक लाख उनसठ हजार एक सौ उनतालीस रुपये प्रति दस ग्राम पर बंद हुआ, जबकि दिन के कारोबारी सत्र में यह एक लाख साठ हजार दो सौ रुपये के ऊपरी स्तर को छू चुका था। दूसरी तरफ, जुलाई डिलीवरी वाली चांदी के अनुबंध में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह प्रति किलोग्राम छह हजार तीन सौ सत्तानवे रुपये की भारी गिरावट के साथ दो लाख सत्तर हजार दो सौ चौवन रुपये पर आ गई। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि वायदा बाजार में निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली ने इन कीमतों को नीचे धकेलने में बड़ी भूमिका निभाई है।

वैश्विक परिदृश्य पर नजर डालें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना शून्य दशमलव सैंतालीस प्रतिशत की कमजोरी के साथ चार हजार पांच सौ चवालिस दशमलव अठहत्तर डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता देखा गया। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय चांदी भी दो दशमलव शून्य एक प्रतिशत की गिरावट के साथ छिहत्तर दशमलव बारह डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई। बाजार के जानकारों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक स्तर पर फिर से बातचीत शुरू होने की उम्मीदों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और महंगाई के दबाव को लेकर चिंताओं को कुछ कम किया है, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में बहुमूल्य धातुओं की मांग पर थोड़ा असर पड़ा है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी के मुताबिक, पिछले दिनों हुई भारी बिकवाली के बाद शॉर्ट कवरिंग और सटोरिया लिवाली ने कीमतों को कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की है, लेकिन लंबी अवधि के लिए बाजार अब भी सतर्क रुख अपनाए हुए है।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सर्राफा बाजार की दिशा काफी हद तक अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की आगामी बैठक के ब्योरों और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। घरेलू मोर्चे पर देश के अलग-अलग राज्यों में टैक्स संरचना और स्थानीय मांग के अंतर के कारण विभिन्न शहरों में कीमतों का अंतर साफ देखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, जहां चेन्नई में चौबीस कैरेट सोने का भाव एक लाख बासठ हजार दो सौ बीस रुपये प्रति दस ग्राम पर चल रहा है, वहीं मुंबई, कोलकाता, इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में यह एक लाख सत्तावन हजार रुपये के आसपास बना हुआ है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता पूरी तरह समाप्त नहीं होती, तब तक सोने और चांदी की कीमतों में यह तीव्र उतार-चढ़ाव जारी रहने की पूरी संभावना है।

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Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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