सोने और चांदी की कीमतों में तेजी, एमसीएक्स पर चांदी ₹2,000 प्रति किलो उछली; मुख्य शहरों के दाम जारी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर चांदी में आई भारी तेजी और देश के प्रमुख शहरों में 24K, 22K व 18K सोने की ताजा कीमतों पर विस्तृत रिपोर्ट।

भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोने की सिल्लियां, चांदी की ईंटें और चांदी के सिक्के सर्राफा बाजार की गतिविधियों को प्रदर्शित करते हुए।
नई दिल्ली: घरेलू सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर बहुमूल्य धातुओं के दामों में आज सुबह के कारोबार में भारी हलचल दर्ज की गई है। वैश्विक भू-राजनीतिक मोर्चे पर जारी अनिश्चितताओं और अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच निवेशकों की सतर्कता का सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर देखने को मिल रहा है। आज शुरुआती कारोबार के दौरान एमसीएक्स पर चांदी की कीमत बाजार खुलते ही 2,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक उछल गई। वहीं, दूसरी ओर बहुमूल्य पीली धातु यानी सोने की कीमतों में भी लगभग 300 रुपये प्रति 10 ग्राम की मजबूती देखी गई है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित देश के प्रमुख महानगरों में स्थानीय करों और मेकिंग चार्ज के आधार पर कीमतों में भिन्नता बनी हुई है।
घरेलू वायदा बाजार के साथ-साथ हाजिर बाजार में भी कीमती धातुओं के दामों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। बीते कारोबारी सत्र के दौरान राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में अलग-अलग प्रवृत्तियां देखने को मिली थीं। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में चुना, जिसके चलते शुरुआती दौर में सोने की हाजिर मांग प्रभावित हुई थी। सर्राफा बाजार बंद होने तक राष्ट्रीय राजधानी में सोना घटकर 1,62,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया था, जबकि इसके उलट चांदी की हाजिर कीमत बढ़कर 2,73,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बंद हुई थी।
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि बिना 3 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और मेकिंग चार्ज के, 24-कैरेट शुद्ध सोने की कीमत 1,57,610 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर स्थिर थी। इसी प्रकार, आभूषण निर्माण में सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाले 22-कैरेट सोने के दाम 1,53,830 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किए गए थे। दूसरी ओर, गुडरिटर्न्स के सुबह के आंकड़ों पर नजर डालें तो वहां 24-कैरेट सोने का भाव 1,58,890 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर देखा गया, जबकि चांदी की कीमत 2,85,000 रुपये प्रति किलोग्राम के ऊंचे स्तर पर ट्रेंड कर रही थी।
बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक कारक इस समय बुलियन मार्केट की दिशा तय कर रहे हैं। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटी) सौमिल गांधी के अनुसार, कूटनीतिक मोर्चे पर किसी बड़े बदलाव या सफलता के अभाव में बाजार के अधिकांश प्रतिभागियों ने आक्रामक पोजीशन लेने से पूरी तरह परहेज किया है। निवेशक इस समय भू-राजनीतिक मोर्चे पर अधिक स्पष्ट संकेतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। स्पष्टता की इसी कमी के चलते कीमती धातुएं एक सीमित दायरे में कारोबार कर रही हैं। इसके साथ ही, कमोडिटी मार्केट अपनी अगली चाल तय करने के लिए कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी डॉलर के सूचकांक और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स (सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज) की गतिविधियों पर भी बहुत बारीकी से नजर बनाए हुए है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो वहां भारतीय समय के अनुसार कुछ विपरीत रुख देखने को मिला, जहां हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) लगभग 1 फीसदी की कमजोरी के साथ 4,534.69 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर चांदी भी 2 फीसदी से कुछ अधिक की गिरावट दर्ज करते हुए 76.49 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले यह बदलाव आगामी कुछ दिनों में घरेलू कीमतों को भी प्रभावित कर सकते हैं।
भविष्य के परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए एलकेपी सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि निवेशकों की नजरें अब आने वाले अमेरिकी कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (पीसीई) महंगाई के आंकड़ों और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों पर टिकी हुई हैं। ये आर्थिक आंकड़े निकट भविष्य में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति संबंधी घोषणाओं और वैश्विक बुलियन बाजार की चाल को गहराई से प्रभावित करेंगे। यदि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में कोई सकारात्मक प्रगति होती है, तो ऊर्जा बाजार में तनाव कम होगा जिससे महंगाई की चिंताएं दूर होंगी और सोने-चांदी के लिए स्थिर माहौल बनेगा। इसके विपरीत, वार्ता में किसी भी प्रकार का गतिरोध ऊर्जा कीमतों को बढ़ाकर सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों को बल देगा, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
