नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार के इतिहास में आज का दिन एक बड़े बदलाव के रूप में दर्ज किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा कीमती धातुओं पर आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) को बढ़ाकर 15 फीसदी करने के फैसले के बाद दिल्ली से लेकर मुंबई तक के बाजारों में कीमतों का 'रॉकेट' देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों ने ₹23,000 से अधिक की ऐतिहासिक छलांग लगाई है, जबकि सोने की चमक भी अब तक के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई है। वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू कर ढांचे में बदलाव के इस दोहरे वार ने निवेशकों और आम उपभोक्ताओं के बीच खलबली मचा दी है।

बाजार के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो राष्ट्रीय राजधानी में चांदी की कीमत में ₹20,500 का भारी उछाल दर्ज किया गया, जिससे इसका भाव ₹2,97,500 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर देर रात के कारोबार में चांदी ₹23,816 की बढ़त के साथ ₹3,02,878 प्रति किलो पर ट्रेड करती देखी गई। सोने की स्थिति भी इससे अलग नहीं है; 24-कैरेट सोने के दाम ₹8,550 की बढ़ोतरी के साथ ₹1,65,350 प्रति 10 ग्राम (कर सहित) के स्तर को पार कर गए हैं। सर्राफा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी तेजी बाजार के लिए अप्रत्याशित है, जिसने दशकों पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।

इस अभूतपूर्व तेजी के पीछे का सबसे बड़ा कारण सरकार द्वारा सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6 फीसदी से बढ़ाकर सीधे 15 फीसदी करना है। इसके अतिरिक्त, प्लैटिनम पर भी शुल्क को 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 15.4 फीसदी कर दिया गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कदम पश्चिम एशिया संकट के कारण विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और अनावश्यक आयात को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन और सोने की खरीद जैसे खर्चों को टालने का आह्वान किया था, जिसके तत्काल बाद यह विधायी बदलाव प्रभावी हो गया है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत ने भी इस आग में घी का काम किया है। कच्चा तेल महंगा होने और विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी की निकासी से रुपया $95.80 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक लुढ़क गया है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के कमोडिटी रिसर्च हेड, हरीश वी. के अनुसार, "आयात शुल्क में वृद्धि से स्थानीय कीमतें बढ़ने और फिजिकल डिमांड पर अस्थायी असर पड़ना तय है। हालांकि, मौजूदा वैश्विक संकट के समय सोना अभी भी निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प बना हुआ है।"

हालांकि, रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) ने इस फैसले पर चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि आयात शुल्क बढ़ाने से अक्सर तस्करी को बढ़ावा मिलता है और यह चालू खाते के घाटे (CAD) को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका नहीं है। खुदरा आभूषण विक्रेताओं का सुझाव है कि सरकार को शुल्क बढ़ाने के बजाय आयात की मात्रा पर अंकुश लगाने जैसे उपायों पर विचार करना चाहिए था। वर्तमान में, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्वर्ण उपभोक्ता है और शादियों के सीजन के बीच इन कीमतों ने मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है।

इस मूल्य वृद्धि का प्रभाव न केवल बड़े महानगरों बल्कि लखनऊ, जयपुर और पटना जैसे शहरों में भी समान रूप से देखा जा रहा है। विशेषज्ञों की सलाह है कि बाजार में अस्थिरता अधिक होने के कारण छोटे निवेशकों को सोच-समझकर कदम उठाने चाहिए। आने वाले दिनों में जब नए आयात शुल्क की लागत पूरी तरह से बाजार में समाहित हो जाएगी, तब कीमतों में और अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है। फिलहाल, सर्राफा बाजार की यह 'गर्मी' कम होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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