आसमान छूती कीमतों के बीच सोने-चांदी में हलचल, ऐतिहासिक तेजी के बाद अब किस दिशा में जाएंगे सोने और चांदी के दाम?
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलर की चाल के असर से घरेलू बाजार में चौबीस कैरेट सोने और चांदी की दरों में अस्थिरता का रुख बना हुआ है।

कमोडिटी बाजार के उतार-चढ़ाव को दर्शाते ग्राफ के सामने मेज पर रखे सोने और चांदी के बिस्कुट।
वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकेतकों के दबाव के बीच घरेलू सर्राफा बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। भारतीय सर्राफा बाजार में आज सोने और चांदी दोनों ही कीमती धातुओं के भाव में हल्की अस्थिरता दर्ज की गई, जिसने निवेशकों और आम उपभोक्ताओं को एक बार फिर बाजार की चाल पर नजर रखने के लिए मजबूर कर दिया है। बाजार के मौजूदा सत्र में चौबीस कैरेट सोने का भाव देश के प्रमुख शहरों में एक लाख तिरेसठ हजार रुपये प्रति दस ग्राम के ऐतिहासिक स्तर के आसपास मंडरा रहा है, जबकि चांदी भी दो लाख पचहत्तर हजार रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है। वैश्विक स्तर पर जारी कूटनीतिक तनाव के चलते सुरक्षित निवेश के रूप में कीमती धातुओं की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
घरेलू बाजार में आज सुबह व्यापार शुरू होते ही बुलियन काउंटरों पर गहमागहमी देखी गई। शुद्धता के पैमाने पर सर्वोच्च माने जाने वाले चौबीस कैरेट सोने की कीमत आज लगभग एक लाख तिरसठ हजार छह सौ सतहत्तर रुपये प्रति दस ग्राम दर्ज की गई। वहीं, आभूषण निर्माण के लिए सबसे ज्यादा उपयोग में लाए जाने वाले बाईस कैरेट सोने का भाव भी लगभग एक लाख पचास हजार सात सौ नब्बे रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर बना हुआ है। दूसरी ओर, औद्योगिक मांग और खुदरा निवेशकों की पसंद मानी जाने वाली चांदी में अधिक उतार-चढ़ाव देखा गया और इसकी कीमत लगभग दो लाख पचहत्तर हजार दो सौ बाईस रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास रिकॉर्ड की गई। देश के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय करों, वैट और मेकिंग चार्ज के अंतर के कारण खुदरा शोरूमों में इन दरों में थोड़ा अंतर दिखाई दे सकता है।
कमोडिटी बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि इस समय भारतीय बाजार पूरी तरह से वैश्विक परिस्थितियों से संचालित हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते राजनयिक गतिरोध ने सर्राफा बाजार में तेजी को सबसे ज्यादा हवा दी है। जब भी वैश्विक पटल पर युद्ध या राजनीतिक संकट के बादल गहराते हैं, तब दुनिया भर के बड़े निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे विकल्पों से अपना पैसा निकालकर सोने में लगाना सुरक्षित समझते हैं। इसके अतिरिक्त, वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की उतार-चढ़ाव भरी चाल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी घरेलू बाजार पर गहरा दबाव बनाया है, जिससे सोने-चांदी की कीमतों को लगातार समर्थन मिल रहा है।
सरकारी और नियामक स्तर पर भी इन कीमती धातुओं की कीमतों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती देने के लिए लगातार की जा रही सोने की खरीदारी और सरकार की आयात शुल्क नीतियों का असर भी कीमतों के निर्धारण में बड़ी भूमिका निभाता है। बाजार विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि आने वाले कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार यानी कॉमेक्स और घरेलू वायदा बाजार यानी एमसीएक्स पर आने वाले आंकड़ों के आधार पर सोने और चांदी दोनों की कीमतों में या तो एक बड़ी एकतरफा तेजी देखी जा सकती है या फिर मुनाफावसूली के कारण कुछ गिरावट आ सकती है। ऐसे में खुदरा खरीदारों और वायदा कारोबारियों को बेहद सतर्कता के साथ निवेश करने की सलाह दी गई है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
