अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच सोने ने रचा नया इतिहास, जानिए क्यों अचानक सस्ती हो गई चांदी!
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की मजबूती और घरेलू मांग में भारी उतार-चढ़ाव के कारण राजधानी के सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं में देखा गया विपरीत रुख।

नई दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की बढ़ती कीमतों और चांदी की में आई अस्थिरता के विश्लेषण के संदर्भ में रखी धातुओं की सांकेतिक तस्वीर।
नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारतीय सर्राफा बाजार में एक अभूतपूर्व हलचल देखी जा रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के हाजिर सर्राफा बाजार में दोनों सबसे मूल्यवान धातुओं, सोने और चांदी की कीमतों में एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत रुख दर्ज किया गया है। जहां एक तरफ घरेलू बाजार में निवेशकों द्वारा की गई नई लिवाली के कारण सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है, वहीं दूसरी तरफ औद्योगिक मांग में आई अचानक सुस्ती के चलते चांदी के भाव धड़ाम से नीचे गिर गए हैं। इस व्यापारिक उठापटक के विपरीत मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों ही धातुओं के वायदा कारोबार में देर रात तक बढ़त का रुझान बना रहा, जिसने खुदरा और थोक व्यापारियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
बाजार के बंद होने तक दिल्ली के हाजिर सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत में पांच हजार रुपये प्रति किलोग्राम की एक बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस भारी बिकवाली के बाद चांदी टूटकर दो लाख छियासठ हजार रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई, जबकि इससे पिछले सत्र में यह दो लाख इकहत्तर हजार रुपये पर बंद हुई थी। इसके विपरीत, चौबीस कैरेट सोने के हाजिर भाव में एक हजार तीन सौ रुपये प्रति दस ग्राम की भारी तेजी देखी गई। इस उछाल के साथ ही पीली धातु का भाव बढ़कर एक लाख चौंसठ हजार नौ सौ रुपये प्रति दस ग्राम के ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया, जो इससे पिछले सत्र में एक लाख त्रेसठ हजार छह सौ रुपये के स्तर पर बंद हुआ था।
वायदा बाजार के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर स्थिति पूरी तरह अलग दिखाई दी। देर रात के सत्र में जुलाई डिलीवरी वाली चांदी चार हजार तीन सौ इक्यासी रुपये यानी लगभग एक दशमलव छह दो फीसदी की बढ़त के साथ दो लाख चौहत्तर हजार पांच सौ रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। ठीक इसी समय वायदा बाजार में सोना भी नौ सौ इक्कीस रुपये के लाभ के साथ एक लाख साठ हजार एक रुपये प्रति दस ग्राम पर बोला जा रहा था। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, बिना किसी टैक्स और मेकिंग चार्ज के चौबीस कैरेट सोने की शुद्ध कीमत एक लाख अट्ठावन हजार पांच सौ साठ रुपये और बाईस कैरेट सोने की कीमत एक लाख चौवन हजार सात सौ पचास रुपये प्रति दस ग्राम के आसपास बनी हुई थी।
देश के अन्य प्रमुख महानगरों में भी सोने की कीमतों में इसी तेजी का असर देखा गया। खुदरा बाजार के सुबह के आंकड़ों के अनुसार देश की राजधानी दिल्ली, लखनऊ, कानपुर और जयपुर में चौबीस कैरेट सोना एक लाख अट्ठावन हजार पांच सौ रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर खुला, जबकि इन शहरों में बाईस कैरेट का भाव एक लाख पैंतालीस हजार तीन सौ रुपये रहा। आर्थिक राजधानी मुंबई और कोलकाता के बाजारों में चौबीस कैरेट सोना एक लाख अट्ठावन हजार तीन सौ पचास रुपये पर दर्ज किया गया। सबसे महंगी बिक्री चेन्नई के बाजार में देखी गई, जहां चौबीस कैरेट सोने का भाव एक लाख साठ हजार नौ सौ दस रुपये और बाईस कैरेट का दाम एक लाख सैंतालीस हजार पांच सौ रुपये प्रति दस ग्राम तक पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार के विधिक और तकनीकी कारणों का विश्लेषण करते हुए कमोडिटी विशेषज्ञों और ब्रोकरेज फर्म कोटक नियो ने बताया कि अमेरिकी बॉन्ड बाजार में हुई बिकवाली में नरमी आने से कीमती धातुओं को वैश्विक स्तर पर कुछ तकनीकी समर्थन मिला है। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर बाजार में व्याप्त आशंकाओं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर और डॉलर सूचकांक की मजबूती ने सोने की वैश्विक कीमतों की इस बढ़त को एक सीमित दायरे में बांधकर रखा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर सोना चार हजार चार सौ बयासी डॉलर प्रति औंस पर बना रहा, जबकि वैश्विक चांदी दो फीसदी से अधिक की मजबूती के साथ पचहत्तर दशमलव चार दो डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस घरेलू और वैश्विक अस्थिरता के पीछे मुख्य कारण पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने में हो रही प्रशासनिक देरी है। इन अंतरराष्ट्रीय संकटों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे दुनिया भर में मुद्रास्फीति यानी महंगाई बढ़ने की चिंताएं गहरी हो गई हैं। मिराए एसेट शेयरखान के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह के अनुसार, वैश्विक निवेशक इस समय अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के बारीक ब्योरे का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं, ताकि ब्याज दरों की भविष्य की दिशा और घरेलू सर्राफा बाजार पर इसके पड़ने वाले तात्कालिक प्रभावों का सटीक आकलन किया जा सके।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
