छह महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा सोना, खरीदार खुश लेकिन निवेशकों की धड़कनें तेज!
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ऊंचे ब्याज दरों की आशंका से अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सर्राफा बाजार में आई भारी मंदी।

भारतीय घरेलू बाजारों में सोने तथा चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट को दर्शाता एक सांकेतिक चित्र।
नई दिल्ली: वैश्विक राजनीतिक पटल पर गहराते संकट और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सर्राफा बाजार में एक बड़ा भूचाल देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंदी के दबाव और भू-राजनीतिक समीकरणों के बदलने के कारण सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। चालू कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमत गिरते-गिरते पिछले छह महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। इस अचानक आई गिरावट ने जहां एक ओर आम उपभोक्ताओं को खरीदारी का अवसर दिया है, वहीं दूसरी ओर बड़े निवेशकों और बाजार विश्लेषकों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। भारतीय बाजार से लेकर वैश्विक बाजारों तक बहुमूल्य धातुओं के दामों में आई इस कमी को हाल के दिनों का सबसे बड़ा बाजार बदलाव माना जा रहा है।
वैश्विक बाजार में आए इस उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता हुआ सैन्य तनाव है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान स्थित कई रणनीतिक ठिकानों पर नए हमलों को अंजाम दिए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक संकट और गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख और शांति समझौता न होने की स्थिति में ईरान को भारी भुगतने की चेतावनी के कारण वैश्विक तेल बाजार में अचानक तेजी आ गई है। ब्रेंट क्रूड और कच्चे तेल की कीमतों में करीब दो फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। तेल की बढ़ती कीमतों के कारण दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जिसने सीधे तौर पर केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों और ब्याज दरों को प्रभावित करने का संकेत दिया है।
आमतौर पर सोने को महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षित निवेश माध्यम के रूप में देखा जाता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में लंबे समय तक ऊंची रहने वाली ब्याज दरों की आशंका ने इस धारणा को बदल दिया है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण निवेशकों का रुझान सोने जैसी बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों से हटने लगा है। अमेरिकी बाजार में मई महीने के दौरान मुद्रास्फीति की दर 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले तीन वर्षों का उच्चतम स्तर है। इसी दबाव के चलते वैश्विक हाजिर बाजार (स्पॉट गोल्ड) में सोना 0.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,063.87 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया, जो कि पिछले साल 21 नवंबर के बाद का सबसे निचला स्तर है। इसी तरह हाजिर चांदी भी 0.9 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 63.15 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार के इन नकारात्मक संकेतों का सीधा और गहरा असर भारतीय घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज के शुरुआती कारोबार में भारी बिकवाली देखी गई। अगस्त डिलीवरी वाला सोना, जो पिछले सत्र में 1,48,017 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ था, आज बाजार खुलने के साथ ही टूटकर 1,46,518 रुपये पर खुला। शुरुआती घंटों में बाजार का दबाव इस कदर बढ़ा कि यह गिरकर 1,46,444 रुपये प्रति 10 ग्राम के न्यूनतम स्तर तक चला गया, जिससे सोने में 1,500 रुपये से अधिक की शुद्ध गिरावट दर्ज की गई। चांदी के बाजार में तो गिरावट और भी अधिक आक्रामक रही। जुलाई डिलीवरी वाली चांदी की कीमत बाजार में 5,000 रुपये से ज्यादा टूटकर 2,30,493 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई।
बाजार के इस बड़े घटनाक्रम के बाद देश के विभिन्न बड़े शहरों के सर्राफा बाजारों में भी स्थानीय करों और मांग के अनुसार कीमतों में भारी बदलाव देखा जा रहा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में खुदरा सोने की कीमतों में आए इस बड़े अंतर से आभूषण कारोबारियों की हलचल बढ़ गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व में जारी युद्ध और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो जाती, तब तक बाजार में यह अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा। यह गिरावट न केवल खुदरा उपभोक्ताओं के लिए बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के आयात बिल के नजरिए से भी आने वाले दिनों में अत्यंत महत्वपूर्ण प्रभाव डालने वाली साबित होगी।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
