भारतीय सर्राफा बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखा गया है, जिसने निवेशकों और आम उपभोक्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू मांग में आए उछाल के बीच सोने की कीमतों ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। भारतीय बाजार में शुद्धता के विभिन्न पैमानों पर सोने के दाम अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों के करीब पहुंच गए हैं, जिससे बाजार में हलचल तेज हो गई है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रास्फीति के खिलाफ सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की बढ़ती मांग ने इन कीमतों को ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

वर्तमान बाजार आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि 24 कैरेट सोने की कीमत, जिसे 99.9 प्रतिशत शुद्धता का मानक माना जाता है, अब 15,536 रुपये प्रति ग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। यह वृद्धि केवल शुद्ध सोने तक सीमित नहीं है, बल्कि आभूषण निर्माण में सबसे अधिक उपयोग होने वाले 22 कैरेट सोने की कीमतों में भी भारी बढ़त दर्ज की गई है। बाजार में 22 कैरेट सोने का भाव 14,241 रुपये प्रति ग्राम के स्तर को छू चुका है। इसके अतिरिक्त, निम्न मध्यम वर्ग और विशिष्ट आभूषण श्रेणियों में लोकप्रिय 18 कैरेट सोने की कीमत भी बढ़कर 11,652 रुपये प्रति ग्राम हो गई है। कीमतों में आए इस तीव्र उछाल ने शादी-ब्याह के सीजन की खरीदारी पर भी व्यापक प्रभाव डालना शुरू कर दिया है।

आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सोने की कीमतों में इस वृद्धि के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारक उत्तरदायी हैं। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने स्वर्ण भंडार में की जा रही वृद्धि ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों को समर्थन दिया है। भारत, जो दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ताओं में से एक है, वहां आयात शुल्क और रुपये की विनिमय दर में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर स्थानीय कीमतों पर पड़ता है। कानूनी और आधिकारिक पहलुओं की बात करें तो भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस ने अब सभी स्वर्ण आभूषणों के लिए हॉलमार्किंग को अनिवार्य कर दिया है। इससे उपभोक्ताओं को शुद्धता की गारंटी तो मिलती है, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण निवेश के पैटर्न में बदलाव देखा जा रहा है।

बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि आने वाले समय में यदि वैश्विक आर्थिक स्थिति में स्थिरता नहीं आती है, तो कीमतों में और अधिक वृद्धि की संभावना बनी रहेगी। वर्तमान में सोने को एक अस्थिर बाजार में सबसे सुरक्षित संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है, जिससे खुदरा खरीदारों के साथ-साथ संस्थागत निवेशक भी सोने की ओर रुख कर रहे हैं। इस मूल्य वृद्धि का दीर्घकालिक प्रभाव आभूषण उद्योग और देश की अर्थव्यवस्था के चालू खाता घाटे पर भी पड़ सकता है। अंततः, सोने की कीमतों का यह ऐतिहासिक सफर न केवल निवेशकों की संपत्ति में वृद्धि कर रहा है, बल्कि भारतीय परिवारों की बचत और खर्च करने की आदतों को भी नई दिशा दे रहा है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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