सोने की कीमतों में तेजी के बीच बिना बिल खरीदारी बढ़ी, कैश डील में ₹10,000 तक की छूट|
सोने के दाम बढ़ने के कारण खरीदार बिना रसीद के अनौपचारिक डील का सहारा ले रहे हैं, जिससे बड़ा डिस्काउंट मिल रहा है|

सोने की बढ़ती कीमतों और आयात शुल्क के बीच ग्राहक बिना बिल के कैश में सोने की खरीदारी कर रहे हैं.
हाल ही में सोने की कीमतों में आई भारी तेजी के बीच कैश में बिना बिल के सोने की खरीदारी का चलन तेजी से बढ़ने की खबर सामने आई है। एक साल पहले के मुकाबले सोना लगभग 28% तक महंगा हो चुका है, जिसके कारण खरीदार कम कीमत में सोना पाने के लिए बिना रसीद के अनौपचारिक डील का सहारा ले रहे हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी मात्रा में सोना खरीदने पर अनौपचारिक कैश डील के जरिए मौजूदा बाजार कीमत से लगभग 6% तक की छूट मिल सकती है। यह डिस्काउंट प्रति 10 ग्राम सोने पर 10,000 रुपये तक हो सकता है। कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि जो डीलर कैश में लेनदेन करते हैं, वे टैक्स और अन्य लागत से बचने वाले फायदे को ग्राहकों के साथ साझा करते हैं। उदाहरण के लिए, 55 साल की एक महिला ने बेटी की शादी के लिए ज्वेलरी खरीदते समय 10 ग्राम सोने पर 5,000 रुपये का डिस्काउंट मिलने की बात कही, हालांकि इसके बदले उन्हें कोई रसीद नहीं दी गई थी। महिला का कहना था कि कीमतें बहुत अधिक होने के कारण यह ऑफर छोड़ना उनके लिए मुश्किल था।
इस प्रकार के बड़े डिस्काउंट मिलने के पीछे मुख्य कारण भारत में सोने पर आयात शुल्क (import duty) का बढ़ना है, जिससे आधिकारिक चैनल से आने वाले सोने की लागत बढ़ जाती है। इसके अलावा, खुदरा खरीदारों को सोने की खरीद पर 3% का जीएसटी भी देना पड़ता है, जिससे बचने के लिए कुछ लोग कैश और बिना बिल की खरीदारी चुनते हैं। बाजार के जानकारों के अनुसार, भारत के अनौपचारिक कैश मार्केट में सोना घरेलू बाजार की मौजूदा कीमत से 200 डॉलर प्रति औंस तक कम कीमत पर उपलब्ध होने की बात सामने आई है। खुदरा ग्राहक ज्वेलर के साथ मोलभाव करके और अपने संबंधों के आधार पर प्रति 10 ग्राम पर 10,000 रुपये तक की छूट हासिल कर सकते हैं।
भारत में सोने का अनौपचारिक बाजार कोई नया नहीं है और यह कई दशकों से मौजूद रहा है। हालांकि, जब आयात शुल्क 6% था, तब आधिकारिक चैनल से बचने की आर्थिक वजह कम थी, लेकिन शुल्क बढ़ने के बाद से इस कारोबार को फिर से बढ़ावा मिला है। भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जहां शादियों, त्योहारों और पारिवारिक बचत के लिए बड़े पैमाने पर सोने का उपयोग होता है और घरेलू उत्पादन सीमित होने के कारण अधिकांश मांग आयात से पूरी होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिना रसीद या बिल के सोना खरीदने पर ग्राहक के पास खरीद का कोई औपचारिक रिकॉर्ड नहीं रहता है। इसके कारण भविष्य में सोने की शुद्धता, स्वामित्व, उसकी बिक्री या टैक्स से जुड़े मामलों में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
