सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच वैश्विक निवेश बैंक जेपी मॉर्गन ने लंबी अवधि में बड़ी तेजी का अनुमान जताया है। बैंक के विश्लेषण के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना साल 2026 के अंत तक 4500 डॉलर प्रति औंस और साल 2027 के मध्य तक 5000 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर को छू सकता है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 4380 डॉलर प्रति औंस पर बनी हुई है।

बीते कुछ महीनों के दौरान सोने की चाल में मिलाजुला रुख देखा गया है। अगस्त महीने में कीमतों में जोरदार तेजी आई थी, जिसके बाद सितंबर में कुछ नरमी दर्ज की गई। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में एलबीएमए गोल्ड प्राइस 13 प्रतिशत बढ़कर 4,386 डॉलर प्रति औंस हो गया था, जो लगभग तीन दशकों में उसका सबसे मजबूत मासिक प्रदर्शन था। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और गोल्ड ईपीएफ से सुस्त प्रवाह के कारण सितंबर में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में 3.9 प्रतिशत और भारतीय घरेलू बाजार में 4.6 प्रतिशत की गिरावट आई।

भारतीय घरेलू बाजार की स्थिति पर नजर डालें तो यहां सोना इम्पोर्ट पैरिटी यानी आयात लागत की तुलना में काफी डिस्काउंट पर बिक रहा है। यह डिस्काउंट जुलाई में 34 डॉलर प्रति औंस था, जो सितंबर में बढ़कर 78 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। पुरानी ज्वेलरी के बदले नई ज्वेलरी के आदान-प्रदान और अनऑफिशियल सप्लाई के चलते घरेलू बाजार में यह अंतर देखा जा रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर पिछले एक महीने में सोने के भाव में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। अक्टूबर डिलीवरी वाले सोने का भाव एक महीने पहले करीब 1,55,400 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो अभी 1,54,263 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। अगस्त महीने में यह 1.64 लाख रुपये के आंकड़े को पार कर गया था।

जेपी मॉर्गन के अनुसार, भविष्य में सोने की कीमतों को दिशा देने वाले पांच प्रमुख संरचनात्मक कारक हैं। इनमें वास्तविक ब्याज यानी रियल यील्ड, अमेरिकी डॉलर का रुख, केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी, अमेरिका का बढ़ता कर्ज और वैश्विक निवेश प्रवाह शामिल हैं। अमेरिकी श्रम बाजार के कमजोर संकेतों ने वास्तविक यील्ड को सीमित रखा है, जिससे सोने को समर्थन मिला है। इसके अलावा, वैश्विक केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को विविधता देने के लिए लगातार सोना खरीद रहे हैं, जिसमें चीन का केंद्रीय बैंक भी शामिल है। अमेरिकी सरकार के बढ़ते कर्ज और डॉलर के अवमूल्यन की आशंकाओं के कारण भी सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।

सोने की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव के बीच जेपी मॉर्गन ने लंबी अवधि में बड़ा अनुमान जारी किया है। बैंक के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर सोना वर्ष 2026 के अंत तक 4500 डॉलर और 2027 के मध्य तक 5000 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर को पार कर सकता है। जानिए इसके पीछे के 5 बड़े कारण।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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