भारतीय अर्थव्यवस्था और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए निवेश का सबसे सुरक्षित और पारंपरिक माध्यम माना जाने वाला 'सोना' आज एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गया है, जहां इसकी चमक आम आदमी की आंखों में चौंधियाहट पैदा कर रही है। वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और घरेलू बाजार में बढ़ती मांग के बीच भारतीय सराफा बाजार में आज सोने की कीमतों ने एक नया इतिहास रच दिया है। रिकॉर्ड तोड़ तेजी के इस दौर में अब सोना खरीदना केवल एक निवेश नहीं, बल्कि एक विलासिता बनता जा रहा है, जिसने निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों को गहरे चिंतन में डाल दिया है।

बाजार से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट शुद्ध सोने (99.9% शुद्धता) की कीमत ₹15,137 प्रति ग्राम के अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है। यदि हम इसे 10 ग्राम की मानक इकाई में देखें, तो यह आंकड़ा ₹1,51,370 प्रति 10 ग्राम बैठता है। केवल शुद्ध सोना ही नहीं, बल्कि आभूषणों के लिए सबसे अधिक मांग में रहने वाले 22 कैरेट सोने (91.6% शुद्धता) की कीमत भी ₹13,875 प्रति ग्राम यानी ₹1,38,750 प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, बजट श्रेणी में आने वाले 18 कैरेट सोने (75% शुद्धता) का भाव ₹11,353 प्रति ग्राम यानी ₹1,13,530 प्रति 10 ग्राम तक जा पहुंचा है।

कीमतों में आए इस जबरदस्त उछाल के पीछे कई जटिल अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण काम कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने के भंडार में की जा रही निरंतर वृद्धि ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति और मांग के संतुलन को प्रभावित किया है। वहीं, भारत में त्योहारी सीजन और आगामी शादियों के मुहूर्त के कारण मांग में आई अचानक तेजी ने कीमतों को ऊपर की ओर धकेला है। सराफा विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम ही दिखाई देती है।

कानूनी और आधिकारिक पहलुओं की बात करें तो इन कीमतों पर स्थानीय स्तर पर लगने वाला वस्तु एवं सेवा कर (GST), मेकिंग चार्ज और विभिन्न राज्यों के अपने कर अलग से लागू होते हैं। केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार सोने के आयात पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि सोने का अत्यधिक आयात देश के चालू खाता घाटे (CAD) को प्रभावित करता है। इसके बावजूद, भारतीयों का सोने के प्रति भावनात्मक लगाव कम होता नहीं दिख रहा है, हालांकि खरीद के पैटर्न में बदलाव जरूर आया है। अब लोग फिजिकल गोल्ड की जगह डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) जैसे विकल्पों को तरजीह देने लगे हैं।

इस ऐतिहासिक मूल्य वृद्धि का सबसे बड़ा प्रभाव आभूषण उद्योग पर पड़ा है। छोटे और मध्यम स्तर के ज्वेलर्स का कहना है कि ऊंचे दामों के कारण फुटफॉल में कमी आई है और लोग पुराने सोने को बदलकर ही नए आभूषण लेने के लिए विवश हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि सोना अब केवल सजावट की वस्तु नहीं रह गया है, बल्कि यह एक अत्यंत कठोर वित्तीय संपत्ति में तब्दील हो चुका है। आने वाले दिनों में बाजार की यह तेजी बरकरार रहती है या कोई सुधार (Correction) आता है, यह पूरी तरह से वैश्विक वित्तीय नीति और निवेशकों के रुझान पर निर्भर करेगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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