भारतीय सर्राफा बाजार में ऐतिहासिक उछाल: पहली बार ₹15,000 के पार पहुंचा 24 कैरेट सोने का भाव

नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था और मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट को प्रभावित करने वाली एक बड़ी खबर सर्राफा बाजार से सामने आ रही है। देश भर में सोने की कीमतों ने अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए एक नया ऐतिहासिक स्तर छू लिया है। वैश्विक अस्थिरता और घरेलू मांग में आए बदलाव के कारण आज भारतीय बाजार में सोने की कीमत ₹15,000 प्रति ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई है। इस अप्रत्याशित वृद्धि ने न केवल निवेशकों को चौंका दिया है, बल्कि शादियों के सीजन में खरीदारी की योजना बना रहे आम नागरिकों के लिए भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

बाजार से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आज 24 कैरेट शुद्ध सोने (99.9% शुद्धता) की कीमत ₹15,283 प्रति ग्राम दर्ज की गई है। यह पहली बार है जब भारतीय बाजार में शुद्ध सोने ने इस ऊंचाई को स्पर्श किया है। वहीं, आभूषणों के लिए सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले 22 कैरेट सोने (91.6% शुद्धता) का भाव ₹14,009 प्रति ग्राम पर पहुंच गया है। इसके अतिरिक्त, 18 कैरेट सोना (75% शुद्धता), जो आमतौर पर डायमंड ज्वेलरी और हल्के वजन के आभूषणों में प्रयोग होता है, ₹11,462 प्रति ग्राम की दर से बिक रहा है। कीमतों में आई यह तेजी पिछले कुछ हफ्तों से जारी उतार-चढ़ाव का परिणाम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का विश्लेषण बताता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर की तुलना में रुपये की स्थिति इस उछाल के प्रमुख कारक हैं। जब भी वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी मांग और कीमत दोनों में वृद्धि होती है। भारतीय सर्राफा बाजार में इस बढ़ोतरी का सीधा असर ज्वेलरी कारोबार पर दिखने लगा है। कई शहरों के प्रमुख बाजारों में ग्राहकों की संख्या में कमी देखी गई है, क्योंकि लोग कीमतों के स्थिर होने का इंतजार कर रहे हैं। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आगामी महीनों में मांग में और भी गिरावट आ सकती है।

कानूनी और नियामक दृष्टिकोण से देखें तो सोने की कीमतों में यह बदलाव भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार की आयात नीतियों से भी प्रभावित होता है। आयात शुल्क में होने वाले किसी भी बदलाव का सीधा प्रभाव स्थानीय कीमतों पर पड़ता है। फिलहाल, बाजार विशेषज्ञों की सलाह है कि छोटे निवेशकों को इस समय जल्दबाजी में बड़ा निवेश करने के बजाय बाजार की दिशा को समझना चाहिए। इस ऐतिहासिक मूल्य वृद्धि ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में पीली धातु की चमक और भी महंगी हो सकती है, जिसका दूरगामी प्रभाव भारतीय उपभोग पैटर्न पर पड़ना तय है।

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Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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