सोने की रफ्तार ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, निवेश करें या इंतजार हर किसी के मन में यही सवाल|
भारतीय सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना ₹15,000 प्रति ग्राम के पार पहुंचा, 22 और 18 कैरेट की कीमतों में भी आई तेजी।

भारतीय सर्राफा बाजार में सोने के आभूषणों का संग्रह, जहां कीमतों में भारी वृद्धि के बाद मांग और निवेश के रुझानों में बदलाव देखा जा रहा है।
भारतीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों ने एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है, जिससे निवेशकों और आम खरीदारों के बीच हलचल तेज हो गई है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू मांग में आए बदलावों के बीच भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत अब 15,066 रुपये प्रति ग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। पीली धातु की इस अभूतपूर्व चमक ने बाजार के पंडितों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या निकट भविष्य में कीमतें स्थिर होंगी या यह तेजी का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।
विस्तृत आंकड़ों पर नजर डालें तो शुद्धता के विभिन्न स्तरों के आधार पर कीमतों में स्पष्ट अंतर देखा जा रहा है। उच्चतम शुद्धता वाले 24 कैरेट सोने (99.9% शुद्धता) की कीमत जहां 15,066 रुपये प्रति ग्राम है, वहीं आभूषणों के लिए सबसे अधिक मांग वाले 22 कैरेट सोने (91.6% शुद्धता) का भाव 13,810 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किया गया है। इसके अतिरिक्त, बजट श्रेणी और हल्के वजन के आभूषणों में लोकप्रिय 18 कैरेट सोने (75% शुद्धता) की कीमत 11,299 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गई है। कीमतों में आया यह उछाल पिछले कुछ महीनों के औसत भाव से काफी अधिक है, जो सीधे तौर पर उपभोक्ता की क्रय शक्ति को प्रभावित कर रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में इस वृद्धि के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक जिम्मेदार हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले रुपये की स्थिति ने आयातित सोने की लागत को बढ़ा दिया है। भारत, जो अपनी सोने की खपत का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है, वैश्विक बाजार में होने वाली छोटी सी हलचल से भी प्रभावित होता है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ाने की रणनीति ने भी वैश्विक स्तर पर कीमतों को समर्थन दिया है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजारों में कीमतों के चढ़ने के रूप में दिखाई दे रहा है।
कानूनी और आधिकारिक दृष्टिकोण से देखें तो इन कीमतों पर वस्तु एवं सेवा कर (GST), टीसीएस और विभिन्न राज्यों के स्थानीय कर भी लागू होते हैं, जो अंतिम खुदरा कीमत को और भी बढ़ा देते हैं। ज्वैलर्स का कहना है कि हॉलमार्किंग अनिवार्य होने के बाद से शुद्धता को लेकर पारदर्शिता तो बढ़ी है, लेकिन उच्च कीमतों के कारण मांग में कुछ गिरावट देखी जा रही है। विशेष रूप से शादियों के सीजन के दौरान सोने की इतनी अधिक कीमत मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट को पूरी तरह बिगाड़ रही है।
सोने को भारत में केवल एक आभूषण के रूप में नहीं, बल्कि एक सुरक्षित निवेश और संकट के समय के साथी के रूप में देखा जाता है। कीमतों में इस रिकॉर्ड वृद्धि ने एक ओर जहां मौजूदा निवेशकों के पोर्टफोलियो की वैल्यू बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर नए खरीदारों के लिए प्रवेश के द्वार कठिन कर दिए हैं। बाजार के जानकारों का सुझाव है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव की स्थिति को देखते हुए छोटे अंतराल में व्यवस्थित तरीके से निवेश करना फिलहाल एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है। आने वाले समय में सोने की चाल वैश्विक आर्थिक संकेतकों और घरेलू खपत के रुझानों पर निर्भर करेगी, जो भारत जैसे स्वर्ण प्रेमी राष्ट्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
