कबाड़ के धंधे से 27 अरब डॉलर के साम्राज्य तक: अब 5 हिस्सों में बंटकर इतिहास रचेगी वेदांता, जानें पूरी स्कीम
दिग्गज माइनिंग कंपनी वेदांता (Vedanta) अगले महीने 5 अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में विभाजित होने जा रही है। चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने इस डीमर्जर की पुष्टि की है, जिसका उद्देश्य कर्ज कम करना और शेयरधारकों की वैल्यू बढ़ाना है। जानें इस पुनर्गठन का पूरा विवरण और भविष्य की योजना।

Vedanta to create history by splitting into five parts
अनिल अग्रवाल की 'वेदांता' का बड़ा फैसला: 5 हिस्सों में बंटने जा रहा है माइनिंग साम्राज्य, जानें किसे क्या मिलेगा?
नई दिल्ली:
भारत की दिग्गज माइनिंग और नेचुरल रिसोर्सेज कंपनी 'वेदांता लिमिटेड' (Vedanta Limited) एक ऐतिहासिक बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने पुष्टि की है कि अगले महीने की शुरुआत तक वेदांता का पुनर्गठन (Restructuring) पूरा हो जाएगा और यह समूह पांच अलग-अलग स्वतंत्र कंपनियों में विभाजित हो जाएगा। पिछले एक साल से चल रही इस जटिल प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य कंपनी के कर्ज के बोझ को कम करना और प्रत्येक बिजनेस वर्टिकल की वास्तविक वैल्यू को अनलॉक करना है।
5 कंपनियों में विभाजन: कौन-कौन सी होंगी नई कंपनियां?
वेदांता की इस डीमर्जर (Demerger) योजना के तहत, मौजूदा वेदांता लिमिटेड से चार नई कंपनियां अलग की जाएंगी। ये सभी कंपनियां शेयर बाजार में स्वतंत्र रूप से लिस्ट होंगी। इन पांच कंपनियों का स्वरूप कुछ इस प्रकार होगा:
- वेदांता एल्युमिनियम (Vedanta Aluminium): यह कंपनी समूह के विशाल एल्युमिनियम कारोबार को संभालेगी।
- तलवंडी साबो पावर (Talwandi Sabo Power): ऊर्जा क्षेत्र पर केंद्रित यह इकाई बिजली उत्पादन का काम देखेगी।
- वेदांता स्टील एंड आयरन (Vedanta Steel and Iron): इसमें समूह के लोहे और स्टील से जुड़े तमाम एसेट्स शामिल होंगे।
- माल्को एनर्जी (Malco Energy): यह कंपनी भी ऊर्जा और संबंधित क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से कार्य करेगी।
- वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited - Base Metals): मूल कंपनी के पास अब मुख्य रूप से बेस मेटल (तांबा और जस्ता आदि) का कारोबार रहेगा।
अनिल अग्रवाल का दृष्टिकोण और मार्केट कैप
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक हालिया इंटरव्यू में अनिल अग्रवाल ने विश्वास जताया कि इस विभाजन के बाद इन पांचों कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Cap) वर्तमान के 27 अरब डॉलर के स्तर से काफी अधिक होगा। उनका मानना है कि अलग-अलग लिस्टिंग होने से निवेशक अपनी पसंद के क्षेत्र (जैसे केवल स्टील या केवल एल्युमिनियम) में निवेश कर सकेंगे, जिससे शेयरों की मांग और कीमत बढ़ेगी।
हिस्सेदारी की बात करें तो, अनिल अग्रवाल के नियंत्रण वाली एक प्राइवेट पेरेंट कंपनी के पास इन सभी पांचों नई कंपनियों के करीब 50% (आधे) शेयर होंगे। इससे प्रबंधन पर उनका नियंत्रण बरकरार रहेगा, जबकि परिचालन के स्तर पर सभी कंपनियां स्वतंत्र होंगी।
चुनौतियां और कानूनी मंजूरी
वेदांता की इस योजना का सफर आसान नहीं रहा है। साल 2023 में जब पहली बार इस प्लान का प्रस्ताव रखा गया था, तब भारत सरकार ने इसका विरोध किया था। सरकार को डर था कि कंपनी के बंटवारे से बकाया राशि की वसूली में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं। हालांकि, कंपनी ने धीरे-धीरे सभी बाधाओं को पार किया और अंततः 16 दिसंबर 2025 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने इस डीमर्जर योजना को अपनी हरी झंडी दे दी। कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) अजय गोयल के अनुसार, मई 2026 तक इन सभी इकाइयों के भारतीय शेयर बाजारों में लिस्ट होने की पूरी संभावना है।
कबाड़ से साम्राज्य तक: अनिल अग्रवाल का सफर
'मेटल किंग' के नाम से मशहूर अनिल अग्रवाल की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। बिहार के पटना में एक साधारण मारवाड़ी परिवार में जन्मे अग्रवाल ने मात्र 20 साल की उम्र में बेहतर भविष्य की तलाश में बिहार छोड़ दिया और मुंबई आ गए। 1970 के दशक में उन्होंने अपना करियर कबाड़ (Scrap) के व्यापार से शुरू किया था।
अपनी मेहनत और दूरदर्शिता के बल पर उन्होंने धीरे-धीरे माइनिंग और मेटल के क्षेत्र में कदम रखा और आज 'वेदांता रिसोर्सेज' एक ऐसी वैश्विक कंपनी है जिसकी मौजूदगी दुनिया के कई देशों में है। आज यह कंपनी तेल, गैस, जस्ता, तांबा और चांदी जैसे प्राकृतिक संसाधनों के उत्खनन में दुनिया की अग्रणी कंपनियों में शुमार है।
वेदांता का यह डीमर्जर भारतीय कॉर्पोरेट जगत के सबसे बड़े पुनर्गठनों में से एक माना जा रहा है। यदि यह सफल रहता है, तो इससे न केवल अनिल अग्रवाल को अपने कर्ज प्रबंधन में मदद मिलेगी, बल्कि छोटे निवेशकों को भी अपने पोर्टफोलियो को सेक्टर-वाइज चुनने की आजादी मिलेगी। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को नई कंपनियों की लिस्टिंग के समय बाजार की अस्थिरता और संबंधित सेक्टर के जोखिमों को ध्यान में रखना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल सामान्य जानकारी है, वित्तीय सलाह नहीं; बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिमों को देखते हुए निवेश का निर्णय अपने सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह पर ही लें।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
