पेट्रोल-डीजल के शोर के बीच पिछले 15 दिनों में बढ़े इन जरूरी चीजों के दाम; लिस्ट देख रह जाएंगे हैरान
पैकेजिंग लागत और कच्चे माल की कीमतें बढ़ने के कारण दिग्गज कंपनियों ने साबुन, डिटर्जेंट, दूध और खाद्य तेल के खुदरा दामों में बढ़ोतरी की है।

मुंबई के एक खुदरा बाजार में बढ़ती इनपुट लागत के कारण एफएमसीजी कंपनियों द्वारा टूथपेस्ट, साबुन और अन्य घरेलू राशन की कीमतों में की गई वृद्धि का असर।
FMCG products price hike Unilever Dabur Colgate : पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी से देश के आम आदमी का बजट पहले से ही पूरी तरह चरमराया हुआ था, लेकिन इस शोर-शराबे के बीच आम उपभोक्ता की जेब पर एक और 'साइलेंट अटैक' हुआ है। देश में पिछले महज पंद्रह दिनों के भीतर दैनिक उपयोग की कई अन्य आवश्यक वस्तुओं के दामों में चुपके से भारी इजाफा कर दिया गया है, जिसकी भनक शायद अब तक देश के अधिकांश नागरिकों को नहीं लग पाई है। सुबह की चाय से लेकर रात के खाने तक और नहाने के साबुन से लेकर ओरल केयर तक, हर मोर्चे पर आम जनता को बिना किसी पूर्व सूचना के महंगाई की एक नई और अदृश्य मार झेलनी पड़ रही है।
इस गुप्त महंगाई की सबसे बड़ी मार रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले एफएमसीजी (FMCG) प्रोडक्ट्स पर पड़ी है, जहां कच्चे माल की कीमतों में ग्यारह प्रतिशत और पैकेजिंग लागत में सीधे छप्पन प्रतिशत के भारी उछाल के बाद देश की दिग्गज कंपनियों ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। हिंदुस्तान यूनिलीवर, डाबर, मैरिको और कोलगेट जैसी बड़ी कंपनियों ने घाटे से उबरने के लिए अपने उत्पादों के दाम बढ़ा दिए हैं, जिसके चलते डव और पीयर्स जैसे प्रीमियम ब्रांड्स के साबुन चार से पांच प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। इसी तरह, डिटर्जेंट की कीमतों में भी पांच से ग्यारह प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि कोलगेट और डाबर जैसी कंपनियों ने अपने टूथपेस्ट रेंज के दाम बढ़ाकर आम आदमी के लिए ओरल केयर को भी बेहद खर्चीला बना दिया है।
रसोई के बजट को सबसे गहरा झटका डेयरी और खाद्य उत्पादों की नई मूल्य सूची से लगा है, जिसने सीधे तौर पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के पोषण पर असर डाला है। देश के प्रमुख डेयरी ब्रांड अमूल ने अपने अमूल गोल्ड के एक लीटर वाले पैकेट की कीमत अड़सठ रुपये से बढ़ाकर सीधे सत्तर रुपये कर दी है, वहीं अमूल ताजा भी पचपन रुपये से बढ़कर अब सत्तावन रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। मदर डेयरी ने भी अपने फुल क्रीम मिल्क की कीमत उन्नहत्तर रुपये से बढ़ाकर बहत्तर रुपये कर दी है, जबकि उसके बफेलो मिल्क के दाम में सीधे पांच रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई है, जिससे यह अब अस्सी रुपये प्रति लीटर के स्तर को छू रहा है।
इसके अतिरिक्त, थोक बाजार में मालभाड़े और परिवहन लागत में हुई अप्रत्याशित वृद्धि का सीधा असर खुदरा बाजार पर दिखाई दे रहा है, जहां दुकानदारों ने खुले चावल और दालों के दाम प्रति किलो पांच से सात रुपये तक बढ़ा दिए हैं। मैरिको कंपनी ने अपने प्रमुख एडिबल ऑयल ब्रांड 'सफोला' की कीमतों में छह से ग्यारह प्रतिशत का इजाफा किया है। हरी सब्जियों की बात करें तो पिछले पंद्रह दिनों में टमाटर तीस-चालीस रुपये प्रति किलो से छलांग लगाकर अब साठ-सत्तर रुपये प्रति किलो पर बिक रहा है, जबकि प्याज, अदरक, हरी मिर्च और नींबू के दामों में भी तेजी आई है। परिवहन लागत के कारण आलू, बैंगन और भिंडी जैसी बुनियादी सब्जियां भी पांच से दस रुपये तक महंगी बेची जा रही हैं।
घर के साथ-साथ अब बाहर खाना-पीना भी आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है, क्योंकि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे ने रेस्टोरेंट और होटलों को अपने मेन्यू कार्ड बदलने पर मजबूर कर दिया है। वर्तमान में इस क्षेत्र की महंगाई दर पांच दशमलव पचहत्तर प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जिसके कारण इनपुट कॉस्ट को रिकवर करने की जद्दोजहद में रेस्टोरेंट मालिकों ने पिछले एक महीने में खाने-पीने के आइटम्स के रेट औसतन एक दशमलव आठ प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं। महंगाई का यह चौतरफा और खामोश हमला यह साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में आम भारतीय परिवारों को अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी जमा पूंजी से और अधिक हिस्सा खर्च करना होगा, जिससे उनके जीवन स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़ना तय है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
