क्या KYC की टेंशन होगी दूर? वित्त मंत्री ने सेबी से किया यह खास आग्रह
निवेशकों की सुविधा के लिए वित्तीय संस्थानों में एक समान केवाईसी प्रक्रिया लागू करने पर जोर, एआई और साइबर खतरों से सुरक्षा के लिए रेगुलेशन में सुधार का प्रस्ताव।

नई दिल्ली में सेबी के 38वें स्थापना दिवस पर संबोधित करतीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
Nirmala Sitharaman SEBI KYC reforms 2026 : भारतीय वित्तीय परिदृश्य में एक युगांतरकारी बदलाव की आहट सुनाई दे रही है, जहां निवेश और बैंकिंग की राह में आने वाली सबसे बड़ी प्रशासनिक बाधा यानी 'केवाईसी' की पेचीदगियों को हमेशा के लिए समाप्त करने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) के 38वें स्थापना दिवस के गरिमामयी अवसर पर देश के वित्तीय नियामक से एक स्पष्ट और कड़ा आग्रह किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूरे वित्तीय तंत्र में एक ऐसी 'यूनिफॉर्म केवाईसी' व्यवस्था लागू की जानी चाहिए जो न केवल सरल और सुरक्षित हो, बल्कि हर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्बाध रूप से कार्य करने में सक्षम हो। यह कदम देश के करोड़ों निवेशकों और सामान्य नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो वर्तमान में अलग-अलग संस्थानों के लिए बार-बार एक ही दस्तावेजी प्रक्रिया को दोहराने की विवशता से जूझ रहे हैं।
वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में वर्तमान व्यवस्था की कमियों को उजागर करते हुए कहा कि बार-बार दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया नागरिकों के लिए अनावश्यक मानसिक और प्रशासनिक बोझ पैदा करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि साझा केवाईसी प्रणाली के निर्माण के लिए सेबी को फाइनेंशियल स्टेबिलिटी एंड डेवलपमेंट काउंसिल (FSDC) और अन्य प्रमुख नियामकों के साथ मिलकर त्वरित गति से कार्य करना चाहिए। उनका दृष्टिकोण स्पष्ट है कि एक डिजिटल संप्रभु राष्ट्र के रूप में भारत को अब ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ना चाहिए जहां एक नागरिक का डेटा एक ही बार सत्यापित हो और वह पूरे वित्तीय बाजार में मान्य हो। यह केवल सुविधा का प्रश्न नहीं है, बल्कि देश की व्यापारिक सुगमता (Ease of Doing Business) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक रणनीतिक प्रयास है।
नियमों की जटिलता पर प्रहार करते हुए वित्त मंत्री ने एक भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक बाजार में रेगुलेशन केवल समस्याओं के पीछे भागने वाले नहीं, बल्कि संभावित जोखिमों का पूर्वानुमान लगाने वाले होने चाहिए। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती वित्तीय धोखाधड़ी और जटिल साइबर खतरों को आधुनिक अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों के रूप में चिन्हित किया। उनके अनुसार, नियामक ढांचा सिद्धांतों पर आधारित (Principle-based) होना चाहिए, न कि केवल प्रतिबंधात्मक। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य के नियम अधिक लचीले और पारदर्शी होने चाहिए और उन्हें तैयार करते समय जनता की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि नवाचार और निवेशक सुरक्षा के बीच एक सटीक संतुलन बना रहे।
समारोह के समापन पर वित्त मंत्री ने भारत की आर्थिक सुदृढ़ता का उल्लेख करते हुए विश्वास जताया कि पिछले एक दशक के वित्तीय अनुशासन ने देश को एक मजबूत धरातल प्रदान किया है। उन्होंने दोहराया कि भारत का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार और मजबूत राजकोषीय स्थिति भारतीय रिजर्व बैंक को नीतियों में अधिक लचीलापन अपनाने की शक्ति देती है। यह ऐतिहासिक सुधार न केवल देश के वित्तीय बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाएगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत को एक सुरक्षित और सुलभ निवेश गंतव्य के रूप में मजबूती से स्थापित करेगा। केवाईसी की इस प्रस्तावित क्रांति का प्रभाव आने वाले समय में हर भारतीय की डिजिटल जीवनशैली और देश की आर्थिक गतिशीलता पर व्यापक रूप से दिखाई देगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
