CA भी नहीं बताएंगे ये 'सीक्रेट'! अब जेब में रखिए पूरा पैसा, फिर भी इनकम टैक्स लगेगा 'शून्य'
वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिली है। नई कर व्यवस्था के तहत अब 12.75 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। जानिए कैसे वेतनभोगी कर्मचारी न्यू और ओल्ड टैक्स रिजीम के बीच सही चुनाव कर सकते हैं और होम लोन, 80C व बीमा के जरिए 4 लाख रुपये से ज्यादा की टैक्स छूट का लाभ उठा सकते हैं।

नई दिल्ली: वित्तीय वर्ष 2025-26 के आगमन के साथ ही भारत के कर ढांचे (Tax Structure) में एक युगांतकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। 'टैक्स सेविंग' की जो परिभाषा दशकों से चली आ रही थी, वह अब पूरी तरह बदल चुकी है। सरकार द्वारा नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) में किए गए प्रमुख संशोधनों ने मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बचत की रणनीति को दो स्पष्ट रास्तों में बांट दिया है। अब टैक्स बचाने के लिए केवल निवेश करना ही एकमात्र विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि सही 'रेजीम' (Regime) का चुनाव करना सबसे महत्वपूर्ण हो गया है।
12.75 लाख रुपये तक 'जीरो टैक्स' का नया युग
इस वर्ष की सबसे बड़ी खबर वेतनभोगी वर्ग (Salaried Class) के लिए है। यदि आपकी वार्षिक आय 12.75 लाख रुपये या उससे कम है, तो आप आधिकारिक तौर पर 'जीरो टैक्स जोन' में हैं। नई कर व्यवस्था के तहत सरकार ने टैक्स रिबेट की सीमा को बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दिया है। इसके अतिरिक्त, वेतनभोगी कर्मचारियों को 75,000 रुपये की मानक कटौती (Standard Deduction) का लाभ भी दिया जा रहा है।
इस गणित को समझना बेहद सरल है: 12,00,000 रुपये (रिबेट सीमा) + 75,000 रुपये (डिडक्शन) = 12.75 लाख रुपये। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस आय वर्ग के लोगों को टैक्स बचाने के लिए पीपीएफ (PPF) या एलआईसी (LIC) जैसी योजनाओं में पैसा लॉक करने की आवश्यकता नहीं है। वे अपनी नकदी (Liquidity) अपने पास रख सकते हैं और नई कर व्यवस्था का लाभ उठा सकते हैं।
12.75 लाख से अधिक आय: पुरानी बनाम नई व्यवस्था की कशमकश
यदि आपकी आय इस सीमा से ऊपर है, तो स्थिति थोड़ी पेचीदा हो जाती है। यहाँ करदाताओं को यह निर्णय लेना होगा कि वे कम दरों वाली 'नई व्यवस्था' में बने रहें या उच्च कटौती वाली 'पुरानी व्यवस्था' (Old Regime) की ओर रुख करें। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, नई व्यवस्था की कम दरों को मात देने के लिए आपको पुरानी व्यवस्था के तहत कम से कम 3.75 लाख से 4 लाख रुपये तक की कटौती (Deductions) का दावा करना होगा।
पुरानी व्यवस्था में टैक्स बचाने के प्रमुख कानूनी उपकरण
जो परिवार पुरानी कर व्यवस्था को चुनना चाहते हैं, उनके लिए यह जानना अनिवार्य है कि वे 4 लाख रुपये के जादुई आंकड़े तक कैसे पहुँच सकते हैं। इसके लिए निम्नलिखित कानूनी प्रावधान सबसे कारगर सिद्ध हो रहे हैं:
- सेक्शन 80C (सीमा: 1.5 लाख रुपये): यह सबसे लोकप्रिय विकल्प है। इसमें बच्चों की ट्यूशन फीस, होम लोन का मूलधन (Principal), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और ईपीएफ/पीपीएफ में किया गया निवेश शामिल है।
- सेक्शन 80D (स्वास्थ्य बीमा): बढ़ती चिकित्सा महंगाई को देखते हुए यह दोहरा लाभ देता है। आप अपने परिवार के लिए 25,000 रुपये और माता-पिता के लिए अतिरिक्त 25,000 रुपये (वरिष्ठ नागरिक होने पर 50,000 रुपये) तक के प्रीमियम पर छूट पा सकते हैं। इसमें 5,000 रुपये का प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप भी शामिल है।
- सेक्शन 24b (होम लोन ब्याज): यह मध्यम वर्ग के लिए 'गेम चेंजर' साबित होता है। खुद के घर में रहने पर आप सालाना 2 लाख रुपये तक के ब्याज पर छूट ले सकते हैं। यदि पति-पत्नी संयुक्त रूप से लोन लेते हैं, तो दोनों अलग-अलग 2-2 लाख रुपये (कुल 4 लाख) का दावा कर सकते हैं।
- एनपीएस (सेक्शन 80CCD 1B): यह धारा 80C की 1.5 लाख रुपये की सीमा के ऊपर अतिरिक्त 50,000 रुपये की छूट प्रदान करती है।
- एचआरए (HRA): किराए के मकान में रहने वाले वेतनभोगी अपने वेतन और किराए के आधार पर भारी छूट का दावा कर सकते हैं।
अंततः, वित्तीय वर्ष 2025-26 का संदेश स्पष्ट है—आंख मूंदकर निवेश करने के बजाय अपनी आय और खर्चों का विश्लेषण करें। यदि आपकी कुल कटौती (HRA + होम लोन + 80C) 4 लाख रुपये से कम है, तो नई कर व्यवस्था में बने रहना ही समझदारी है। लेकिन यदि आपके पास होम लोन और बड़े खर्चे हैं, तो पुरानी व्यवस्था अब भी आपके लिए ढाल का काम कर सकती है। करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम निर्णय लेने से पहले अपनी 'नेट टैक्सेबल इनकम' की गणना अवश्य करें।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
