Bank Union Protest 2026 : देश के वित्तीय गलियारों में आज सन्नाटा पसरा है। मंगलवार को 'यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स' (UFBU) के आह्वान पर बुलाई गई देशव्यापी हड़ताल ने सरकारी बैंकिंग व्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। 'फाइव डे वर्किंग' (सप्ताह में पांच दिन काम) की अपनी प्रमुख मांग को लेकर लाखों बैंक कर्मचारी आज सड़कों पर हैं, जिसका सीधा असर आम जनता के रोजमर्रा के वित्तीय लेनदेन पर पड़ रहा है।

हड़ताल का व्यापक असर: चेक से लेकर कैश तक सब प्रभावित

मंगलवार सुबह से ही देश के प्रमुख सरकारी बैंकों, जैसे भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखाओं में कामकाज ठप देखा गया। हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाओं का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है:

  • नकद लेनदेन: शाखाओं में नकद जमा और निकासी की सुविधा पूरी तरह बंद है।
  • चेक क्लियरेंस: करोड़ों रुपये के चेक क्लियरेंस की प्रक्रिया अटक गई है, जिससे व्यापारिक लेनदेन में बाधा आ रही है।
  • एटीएम संकट: हालांकि एटीएम सेवाएं चालू हैं, लेकिन शाखाएं बंद होने के कारण कुछ क्षेत्रों में नकदी की उपलब्धता कम होने की आशंका है।

राहत की बात यह है कि HDFC, ICICI और Axis Bank जैसे निजी क्षेत्र के बैंक इस हड़ताल का हिस्सा नहीं हैं, वहां कामकाज सामान्य रूप से जारी है। साथ ही, UPI और इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं सुचारू रूप से चल रही हैं।

विवाद की जड़: क्यों विफल हुई वार्ता ?

इस हड़ताल की पटकथा 23 जनवरी को ही लिखी जा चुकी थी, जब मुख्य श्रम आयुक्त के साथ बैंक यूनियनों की बैठक बेनतीजा रही। UFBU, जो नौ बैंक यूनियनों का एक संयुक्त मंच है, मार्च 2024 में हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते को पूरी तरह लागू करने की मांग कर रहा है।

विवाद का मुख्य बिंदु: बैंक कर्मचारियों की मांग है कि हर शनिवार को आधिकारिक छुट्टी घोषित की जाए। हालांकि इसे द्विपक्षीय समझौते में शामिल किया गया था, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी नहीं की गई है, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष है।

बैंकों की तैयारी और आधिकारिक रुख :

देश के सबसे बड़े बैंक, एसबीआई (SBI) ने स्टॉक एक्सचेंजों को पहले ही सूचित कर दिया था कि वे कामकाज सामान्य रखने की कोशिश करेंगे, लेकिन कर्मचारियों की भारी भागीदारी के कारण सेवाओं में व्यवधान अपरिहार्य है। अधिकांश सरकारी बैंकों ने ग्राहकों को डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने की सलाह दी है।

यह हड़ताल केवल एक कार्य-बंदी नहीं है, बल्कि यह बैंक कर्मचारियों और सरकार के बीच उस विश्वास की कमी को भी दर्शाती है जो लंबे समय से चली आ रही मांगों के पूरा न होने से पैदा हुई है। आज शाम तक की स्थिति यह स्पष्ट करेगी कि क्या सरकार वार्ता की मेज पर वापसी करेगी या यह गतिरोध और लंबा खिंचेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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