Economic Survey 2026 : भारत अपनी आजादी के शताब्दी वर्ष (2047) की ओर कदम बढ़ाते हुए एक ऐसे सामाजिक सुरक्षा तंत्र का निर्माण कर रहा है, जहाँ हर नागरिक का भविष्य वित्तीय रूप से सुरक्षित होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गुरुवार को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने देश के बदलते आर्थिक भूगोल की एक सुनहरी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, बीमा और पेंशन क्षेत्र में हुए क्रांतिकारी सुधारों ने न केवल वित्तीय समावेशन को गहरा किया है, बल्कि देश के वंचित वर्गों को मुख्यधारा की सुरक्षा से जोड़ दिया है।

पेंशन व्यवस्था में ऐतिहासिक उछाल: एनपीएस और अटल योजना का कमाल

सर्वेक्षण में रेखांकित किया गया है कि पेंशन फंड नियामक (PFRDA) ने एक ऐसी बहु-स्तरीय व्यवस्था खड़ी की है, जिसने बाजार से जुड़ी योजनाओं और सरकारी सुरक्षा के बीच बेहतरीन संतुलन बनाया है।

  • NPS का दबदबा: 31 दिसंबर 2025 तक नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के ग्राहकों की संख्या 211.7 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। वहीं, इसके तहत प्रबंधित परिसंपत्तियां (AUM) 16.1 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं।
  • अटल पेंशन योजना (APY): असंगठित क्षेत्र के लिए वरदान साबित हुई इस योजना ने 43.7% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) के साथ करोड़ों लोगों को अपने दायरे में लिया है।
  • UPS की नई पहल: 2025 में शुरू हुई 'यूनिफाइड पेंशन स्कीम' (UPS) ने पेंशन ढांचे को और अधिक समावेशी बना दिया है।

बीमा क्षेत्र में 'गेम चेंजर' बदलाव: स्वास्थ्य बीमा ने मोटर को पछाड़ा

भारतीय बीमा क्षेत्र अब '2047 तक सभी के लिए बीमा' के विजन की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, गैर-जीवन बीमा (Non-life Insurance) के क्षेत्र में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखा गया है। पहली बार, स्वास्थ्य बीमा कुल घरेलू प्रीमियम के 41% हिस्से के साथ सबसे बड़ा सेगमेंट बन गया है, जिसने मोटर बीमा को पीछे छोड़ दिया है।

वहीँ, जीवन बीमा अब भी क्षेत्र का आधार स्तंभ बना हुआ है, जिसके पास कुल प्रबंधित परिसंपत्तियों का 91% हिस्सा है। वित्त वर्ष 2025 में जीवन बीमा कंपनियों ने पॉलिसीधारकों को 6.3 लाख करोड़ रुपए के लाभ का भुगतान कर समाज में वित्तीय सुरक्षा का भरोसा मजबूत किया है।

  • कानूनी सुधार और टैक्स छूट: 'सबका बीमा' की ओर कदम
  • सर्वेक्षण ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि सरकार के नीतिगत निर्णयों ने बीमा को आम आदमी की पहुँच में ला दिया है।
  • GST में राहत: जीवन और व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी में दी गई छूट ने प्रीमियम को सस्ता और किफायती बना दिया है।
  • एफडीआई (FDI) की नई सीमा: 'सबका बीमा, सबकी सुरक्षा एक्ट, 2025' के तहत बीमा क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है, जिससे वैश्विक पूंजी और नवाचार के रास्ते खुल गए हैं।
  • नियामक लचीलापन: IRDAI द्वारा अपनाए गए सिद्धांत-आधारित नियामक ढांचे ने कंपनियों पर अनुपालन का बोझ कम किया है, जिससे नई और बेहतर पॉलिसियां बाजार में आ रही हैं।
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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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