देशभर में धनतेरस का पावन पर्व बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस शुभ अवसर पर सोने-चांदी के आभूषणों और सिक्कों की खरीदारी करना भारतीय परंपरा में अत्यंत शुभ माना जाता है। लेकिन इस बार त्यौहारी खरीदारी के बीच एक गंभीर चेतावनी भी सामने आई है। सस्ते के चक्कर में बिना पक्के बिल के सोना खरीदना ग्राहकों के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है। यदि ऐसे सोने की शुद्धता में कोई गड़बड़ी निकलती है, तो ग्राहक के पास शिकायत या सुनवाई का कोई कानूनी विकल्प नहीं बचता है।

इंपोर्ट ड्यूटी और टैक्स के कारण ग्रे मार्केट में तेजी

भारत में कच्चे तेल के बाद मूल्य के लिहाज से सबसे अधिक आयात (इंपोर्ट) सोने का ही होता है। देश में सोने का उत्पादन बहुत कम है, इसलिए मांग को पूरा करने के लिए अधिकांश सोना विदेशों से मंगाया जाता है। सरकार ने 13 मई को सोने पर आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था। यदि इसमें 3% जीएसटी (GST) को भी जोड़ दिया जाए, तो सोने के कुल आयात पर टैक्स की दर 18.45% तक पहुँच जाती है।

उच्च टैक्स दरों के कारण देश में सोने की तस्करी में भारी इजाफा देखा गया है। तस्कर टैक्स चुकाए बिना सोना लाते हैं, जिससे सरकार को राजस्व का भारी नुकसान होता है। माना जा रहा है कि अनौपचारिक या 'ग्रे मार्केट' में सोने की कीमत आधिकारिक बाजार दर से लगभग 200 डॉलर प्रति औंस कम है।

10 में से 3 ग्राहक अनौपचारिक चैनल से खरीद रहे हैं सोना

'लोकल सर्कल्स' द्वारा किए गए एक हालिया सर्वे में 21,651 लोगों ने अपनी राय दी। सर्वे में जब लोगों से पूछा गया कि वे धनतेरस पर सोना किस तरह खरीदेंगे, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए:

  • 71% ग्राहक: इन्होंने कहा कि वे जौहरी से उचित और पक्के बिल के साथ ही सोना खरीदेंगे।
  • 29% ग्राहक: यानी 10 में से लगभग 3 लोगों का कहना था कि वे सस्ते के चक्कर में अनौपचारिक (इनफॉर्मल) माध्यमों से सोना खरीदेंगे।

अनौपचारिक माध्यमों से खरीदे गए सोने पर न तो पक्का बिल मिलता है और न ही हॉलमार्किंग। ऐसे में यदि सोने की शुद्धता या वजन में धोखाधड़ी होती है, तो ग्राहकों के पास इसका कोई प्रमाण नहीं होता और वे कहीं शिकायत भी नहीं दर्ज करा सकते।

ग्राहकों की मांग और बिना बिल के नुकसान

सर्वे में लोगों से तस्करी रोकने के उपायों पर भी राय मांगी गई। लगभग 40% लोगों का मानना है कि सरकार को सोने की तस्करी रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए, जबकि 30% ने आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) की समीक्षा करने की सलाह दी। 17% लोगों ने तस्करी का सोना बेचने वाले दुकानदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की और 5% लोगों का कहना था कि ग्राहकों को जागरूक किया जाना चाहिए।

बिना बिल के सोना खरीदने से न केवल ग्राहक के साथ ठगी की आशंका बनी रहती है, बल्कि इससे सरकार को मिलने वाले कस्टम ड्यूटी और जीएसटी का भी बड़ा नुकसान होता है।

धनतेरस पर बाजार में 1 लाख करोड़ के कारोबार का अनुमान

व्यापारिक संगठन 'कैट' (CAIT) के अनुसार, इस धनतेरस पर देशभर में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कुल कारोबार का अनुमान जताया गया है। इसमें से अकेले सोने और चांदी की बिक्री लगभग 60 हजार करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है। बाजार में इस समय 14 और 18 कैरेट के हल्के गहनों, चांदी के सिक्कों, सजावटी वस्तुओं के साथ-साथ शुभ मानी जाने वाली आकृतियों जैसे मछली, कछुआ और हाथी की भारी मांग बनी हुई है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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