प्रसिद्ध एनर्जी ड्रिंक ब्रांड रेड बुल ने अपने प्रॉडक्ट के लिए 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द का इस्तेमाल बंद करने के भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस अमित महाजन ने FSSAI से कड़ा सवाल किया है कि क्या यह कार्रवाई करने से पहले कंपनी को कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था या अपना पक्ष रखने का कोई मौका दिया गया था या नहीं?

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि यदि कंपनी को बिना किसी नोटिस या सुनवाई के मौका दिए बिना ही यह आदेश थमाया गया है, तो कोर्ट को इस आदेश को रद्द करना पड़ सकता है। इसके साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट करने को कहा कि क्या ऐसी कोई आपातकालीन या तत्काल स्थिति आ गई थी, जिसके चलते कंपनी का पक्ष सुने बिना ही इस तरह की कार्रवाई करना जरूरी हो गया था?

अदालत ने FSSAI से यह भी जवाब मांगा है कि आखिर किस विशिष्ट आधार पर रेड बुल के उत्पादों के लिए 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने का यह फैसला लिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया के साथ-साथ कोर्ट ने उन परिस्थितियों को भी गहराई से समझने की कोशिश की, जिनके तहत यह कार्रवाई अमल में लाई गई।

दूसरी ओर, रेड बुल कंपनी की तरफ से अदालत में दलील दी गई कि FSSAI के इस आदेश की वजह से कंपनी के प्रॉडक्ट की ब्रांडिंग और बाजार में उसकी वर्षों पुरानी पहचान पर सीधा और नकारात्मक असर पड़ रहा है। कंपनी ने हाई कोर्ट से इस आदेश पर तुरंत रोक लगाने और इसे पूरी तरह से रद्द करने की मांग की है।

अदालत ने FSSAI को निर्देश दिया है कि वह इन सभी बिंदुओं पर अपना जवाब दाखिल करे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को तय की गई है, जिसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि FSSAI का इस पर क्या रुख रहता है और अदालत इस पर क्या अगला निर्णय लेती है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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