कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट; ब्रेंट क्रूड टूटकर 78.39 डॉलर पर आया
अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरे, भारतीय रुपये को मजबूती मिलने की उम्मीद।

वैश्विक बाजार में अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की संभावना के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के संदर्भ को दर्शाती तेल रिफाइनरी और पाइपलाइन की एक प्रतीकात्मक तस्वीर।
Crude oil prices drop 2026 : अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से बुधवार का दिन एक बड़ी हलचल लेकर आया, जहां पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने की संभावनाओं के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 1 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। लंबे समय से चल रहे ईरान संघर्ष के समाप्त होने और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने की उम्मीदों ने निवेशकों और वैश्विक कारोबारियों के रुख को पूरी तरह बदल दिया है। इस भू-राजनीतिक बदलाव का सीधा असर तेल के खेल पर पड़ा और अंतरराष्ट्रीय तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.72 प्रतिशत की कमजोरी के साथ टूटकर 78.39 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ फिसलकर 75.35 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। इस अचानक आई गिरावट ने वैश्विक बाजारों में बिकवाली का दबाव बढ़ा दिया है।
इस बड़े बाजार क्रैश की मुख्य वजह पश्चिम एशिया के गंभीर संघर्ष को समाप्त करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौते से जुड़ी जानकारियों का सार्वजनिक होना रही। इस कूटनीतिक कदम पर आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि तेहरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। इसी के साथ एक अमेरिकी अधिकारी ने इस ऐतिहासिक समझौते के कानूनी पहलुओं की पुष्टि करते हुए बताया कि आधिकारिक तौर पर इस समझौते पर अंतिम हस्ताक्षर होने के बाद ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर से तेल बेचने की अनुमति दे दी जाएगी। इस सप्ताह हस्ताक्षरित हुए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत पूर्व में अप्रैल महीने के दौरान घोषित युद्धविराम की अवधि को 60 दिनों के लिए और आगे बढ़ा दिया गया है, ताकि दोनों देशों के शीर्ष राजनयिक स्थायी शांति समझौते के लिए एक ठोस और सर्वमान्य रोडमैप तैयार कर सकें।
इस अंतरराष्ट्रीय समझौते के आधिकारिक नियमों और शर्तों के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका जल्द ही ईरान के विभिन्न बंदरगाहों पर लगाए गए अपने कड़े आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटा लेगा। इसके बदले में तेहरान भी होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों और अन्य महत्वपूर्ण वाणिज्यिक समुद्री यातायात को बिना किसी बाधा के सुरक्षित गुजरने की अनुमति प्रदान करेगा। गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा बीती 28 फरवरी को किए गए हमलों के बाद से ही ईरान ने प्रतिशोध के तौर पर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को प्रभावी रूप से बाधित कर रखा था, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई थी। अब ब्रेंट क्रूड में आई इस तेज गिरावट और इसके 79 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आने का बड़ा सकारात्मक असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखने की उम्मीद है। भारत के संदर्भ में, एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट योजना के माध्यम से देश में बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी प्रवाह (Capital Inflow) होने की प्रबल संभावना बन गई है, जिससे न केवल भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और अधिक मजबूत होगा, बल्कि यह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) को बाजार में मुनाफावसूली और बिकवाली करने से भी हतोत्साहित करेगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
