मंडियों में फसलों ने उगला 'सोना'; MSP से 60% ज्यादा भाव पर बिका तिल
भारतीय मंडियों में फसलों की कीमतों में भारी उछाल! जनवरी 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार बाजरा, ज्वार और विशेषकर तिल की कीमतें MSP से 60% तक ऊपर पहुँच गई हैं। तिल ₹16,000 प्रति क्विंटल के पार, जबकि सोयाबीन और कपास में भी रिकॉर्ड तेजी। जानें प्रमुख शहरों की मंडियों में आवक और भाव का पूरा विवरण और किसानों को मिल रहे बम्पर मुनाफे की विस्तृत रिपोर्ट।

Commodity Market India 2026 : देश के कृषि बाजारों (मंडियों) से आने वाले नवीनतम आंकड़े भारतीय किसानों के लिए खुशहाली का नया पैगाम लेकर आए हैं। जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में प्रमुख फसलों की कीमतों ने न केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की सीमाओं को लांघा है, बल्कि कई जिंसों ने ऐतिहासिक ऊंचाइयों को छू लिया है। खरीफ और रबी फसलों की आवक के बीच बाजार में बढ़ती मांग ने 'अन्नदाता' की मेहनत की चमक को दोगुना कर दिया है।
बाजार का हाल: MSP बनाम वर्तमान भाव
29 जनवरी 2026 तक के ताजा आंकड़े बताते हैं कि अनाज से लेकर तिलहन तक, हर क्षेत्र में कीमतों का ग्राफ तेजी से ऊपर की ओर बढ़ा है। बाजरा, ज्वार और मक्का जैसी फसलों में व्यापारियों की भारी दिलचस्पी देखी जा रही है।
- अनाज (Cereals): बाजरा का भाव ₹3,715 प्रति क्विंटल तक जा पहुंचा है, जो ₹2,775 के MSP से काफी ऊपर है। वहीं ज्वार ने ₹5,370 के स्तर को छूकर बाजार विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। मक्का और गेहूं की कीमतों में भी MSP के मुकाबले ₹500 से ₹800 तक का उछाल देखा जा रहा है।
- तिलहन (Oil Seeds): तिलहन बाजार में तिल (Sesamum) की कीमतों ने 'आसमान' छू लिया है। जहाँ इसका MSP ₹9,846 निर्धारित है, वहीं मंडियों में यह ₹16,083 प्रति क्विंटल के अविश्वसनीय भाव पर बिक रहा है। सोयाबीन और मूंगफली के दाम भी ₹5,500 से ₹8,000 के बीच बने हुए हैं।
- रेशेदार फसलें: कपास की कीमतों में भी मजबूती देखी गई है, जो ₹8,028 प्रति क्विंटल के स्तर पर कारोबार कर रही है।
आवक और मांग का समीकरण :
बाजार में कीमतों की इस 'महा-तेजी' का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय मांग और घरेलू स्टॉक में आई कमी को माना जा रहा है। 28 और 29 जनवरी के बीच मंडियों में मक्का और सोयाबीन की आवक (Arrival) में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अकेले सोयाबीन की आवक 2,579 मीट्रिक टन रही, जो बाजार में इसकी निरंतर खपत को दर्शाती है।
नीतिगत और प्रशासनिक पहलू :
कृषि मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 2026-27 के लिए घोषित MSP का उद्देश्य किसानों को सुरक्षा कवच प्रदान करना था, लेकिन खुले बाजार में बेहतर भाव मिलना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है। सरकार मंडियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ई-नाम (e-NAM) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की निगरानी बढ़ा रही है ताकि बिचौलियों के हस्तक्षेप को कम किया जा सके और किसानों को सीधा लाभ मिल सके।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
