Bank Melli Iran assets 2026 : मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव और इजरायल-ईरान के बीच बढ़ती सैन्य तनातनी ने दुनिया का ध्यान ईरान की आंतरिक शक्ति और उसकी वित्तीय रीढ़ की हड्डी की ओर खींच लिया है। युद्ध की आहट के बीच यह सवाल मौजूं हो गया है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रहे ईरान का बैंकिंग तंत्र आखिर कितना मजबूत है। जिस प्रकार भारत में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) बैंकिंग क्षेत्र का निर्विवाद सम्राट है, ठीक उसी तरह ईरान की अर्थव्यवस्था की धुरी 'बैंक मिल्ली ईरान' (BMI) के इर्द-गिर्द घूमती है। यह केवल एक बैंक नहीं, बल्कि ईरान की वित्तीय संप्रभुता का प्रतीक है, जो दशकों से वैश्विक दबाव के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था को ऑक्सीजन दे रहा है।

बैंक मिल्ली ईरान संपत्ति, जमा पूंजी और ऋण वितरण के मामले में देश का सबसे विशाल और प्रभावशाली संस्थान है। शत-प्रतिशत सरकारी स्वामित्व वाले इस बैंक की जड़ें ईरान की वित्तीय प्रणाली में इतनी गहरी हैं कि इसके बिना तेहरान के आर्थिक पहिए की कल्पना करना भी असंभव है। बैंक मिल्ली की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी पहुंच केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जर्मनी, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम जैसे यूरोपीय देशों में भी अपनी शाखाओं का संचालन करता है। वर्तमान अनुमानों के अनुसार, ईरान के पूरे बैंकिंग सेक्टर की कुल संपत्ति लगभग 356 क्वाड्रिलियन रियाल है, जिसमें बैंक मिल्ली का हिस्सा सबसे प्रमुख है। ऐतिहासिक रूप से इस बैंक की व्यक्तिगत संपत्ति 45 बिलियन डॉलर से 64 बिलियन डॉलर (भारतीय मुद्रा में करीब 3.7 लाख करोड़ से 5.3 लाख करोड़ रुपये) के बीच आंकी गई है।

यदि हम इसकी तुलना भारत के बैंकिंग दिग्गज एसबीआई से करें, तो वैश्विक आर्थिक पटल पर एक बड़ा अंतर उभर कर सामने आता है। वर्ष 2026 के आंकड़ों के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की कुल संपत्ति लगभग ₹76.73 लाख करोड़ ($915 बिलियन से अधिक) तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि अकेला एसबीआई न केवल बैंक मिल्ली से आकार में कई गुना बड़ा है, बल्कि यह पूरी ईरानी अर्थव्यवस्था के कुल आकार को भी कड़ी टक्कर देता है। हालांकि, ईरान के भीतर बैंक मिल्ली का 3300 से अधिक शाखाओं वाला विशाल नेटवर्क उसे एक ऐसी शक्ति बनाता है, जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में करोड़ों ग्राहकों को अपनी सेवाएं प्रदान कर देश की रग-रग में बसा हुआ है।

ईरान के बैंकिंग परिदृश्य में बैंक मिल्ली के अलावा भी कई अन्य खिलाड़ी अपनी छाप छोड़ रहे हैं। 'बैंक सदेरत ईरान' अपनी 59 बिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति के साथ एक बड़ी चुनौती पेश करता है, जबकि 'बैंक मिल्लत' अपनी तकनीकी नवाचार और डिजिटल प्रगति के लिए जाना जाता है। वहीं निजी क्षेत्र में 'बैंक पासरगाड' ने अपनी व्यावसायिक सफलता से एक अलग पहचान बनाई है। अंततः, मिडिल ईस्ट के मौजूदा संकटपूर्ण हालातों में ये बैंक केवल वित्तीय लेन-देन के केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि ये ईरान की उस आर्थिक प्रतिरोधक क्षमता की परीक्षा भी हैं, जो युद्ध और प्रतिबंधों के बीच खुद को बचाए रखने की जद्दोजहद कर रही है। आने वाले समय में इन बैंकों की स्थिरता ही यह तय करेगी कि ईरान वैश्विक भू-राजनीतिक दबाव को झेलने में कितना सक्षम साबित होगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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