क्या आज से कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में आएगा भारी उछाल? जानें क्या है नए दाम
तेल मार्केटिंग कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें बढ़ाईं, होटल और रेस्तरां का बजट बिगड़ेगा जबकि घरेलू रसोई गैस की दरें स्थिर रहेंगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा भारत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की नई दरें लागू की गई हैं।
LPG Price Hike : जून महीने की शुरुआत देश के व्यावसायिक क्षेत्र के लिए एक बड़े आर्थिक झटके के साथ हुई है। तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में मचे भूचाल का सीधा असर घरेलू बाजार पर डालते हुए 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 42 रुपये तक की भारी बढ़ोतरी कर दी है। एक जून की सुबह जैसे ही इन नई दरों को लागू किया गया, वैसे ही देश के होटल, रेस्तरां, ढाबा और कैटरिंग उद्योग में हड़कंप मच गया। रोजमर्रा के कामकाज के लिए कमर्शियल गैस पर निर्भर रहने वाले छोटे और बड़े व्यापारियों के सामने अब अपने मुनाफे को बचाए रखने और कीमतों को संतुलित रखने की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। हालांकि, इस चौतरफा मार के बीच आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह रही कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे रसोई का बजट फिलहाल सुरक्षित है।
इस ताजा मूल्य संशोधन के बाद देश के चारों महानगरों समेत प्रमुख शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडरों के दाम आसमान छूने लगे हैं। देश की राजधानी दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये का इजाफा होने से अब यह बढ़कर 3113.50 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, आर्थिक राजधानी मुंबई में व्यापारियों को अब एक सिलेंडर के लिए 3067 रुपये चुकाने होंगे। कोलकाता में कीमतों में सबसे ज्यादा 53.50 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके बाद वहां नया रेट 3255 रुपये हो गया है, जबकि चेन्नई में यह आंकड़ा 3283 रुपये पर पहुंच चुका है। इसके विपरीत, घरेलू सिलेंडर के मोर्चे पर शांति बनी हुई है, जहां दिल्ली में यह 913 रुपये, मुंबई में 912.50 रुपये और पटना में 1002.50 रुपये पर स्थिर बना हुआ है, जो मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए इस महँगाई के दौर में एक बड़ी सांत्वना है।
वैश्विक स्तर पर ईंधन के दामों में आ रही इस तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव एक मुख्य कारक बनकर उभरा है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव की स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को पूरी तरह से अस्थिर कर दिया है, जिसका खामियाजा भारत जैसे विकासशील देश को भुगतना पड़ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, जिसमें लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल, 65 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 90 प्रतिशत एलपीजी शामिल है। आपूर्ति श्रृंखला में पैदा हुए इस व्यवधान और डॉलर के मुकाबले रुपये के उतार-चढ़ाव ने तेल कंपनियों को कीमतें बढ़ाने पर मजबूर किया है। सरकारी नीतियों और हर महीने की पहली तारीख को होने वाले इस मूल्य संशोधन ने यह साफ कर दिया है कि जब तक वैश्विक बाजार शांत नहीं होते, तब तक भारतीय बाजारों में भी ईंधन की कीमतों का यह दबाव और व्यापारिक वर्ग की चिंताएं कम होने वाली नहीं हैं

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
