भारत में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच कोका-कोला के सबसे बड़े बॉटलर SLMG बेवरेजेज ने अनुमान जताया है कि आने वाले वर्षों में जीरो-कैलोरी और शुगर-फ्री ड्रिंक्स उसकी कुल बिक्री का 5-6% हिस्सा बन सकती हैं। कंपनी नए प्लांट्स, बड़े निवेश और विस्तार योजनाओं के जरिए तेजी से बढ़ती मांग को पूरा करने की तैयारी कर रही है।

भारत में बदलती उपभोक्ता आदतों और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता का असर अब पेय पदार्थ उद्योग पर भी साफ दिखाई देने लगा है। देश में कोका-कोला के सबसे बड़े बॉटलिंग पार्टनर SLMG बेवरेजेज ने अनुमान जताया है कि आने वाले कुछ वर्षों में उसके कुल कारोबार में जीरो-कैलोरी और शुगर-फ्री पेय पदार्थों की हिस्सेदारी 5 से 6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यह अनुमान ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में स्वास्थ्य के प्रति सजग उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और पारंपरिक शीतल पेयों के विकल्पों की मांग तेज हो रही है।

कंपनी के अनुसार, शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ता, युवा पेशेवर वर्ग और फिटनेस को प्राथमिकता देने वाले लोग तेजी से कम चीनी या बिना चीनी वाले पेय पदार्थों की ओर रुख कर रहे हैं। मोटापा, मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को लेकर बढ़ती जागरूकता के कारण उपभोक्ता अपने दैनिक खान-पान और पेय पदार्थों के चुनाव में अधिक सतर्क हो गए हैं। यही वजह है कि कोका-कोला जीरो शुगर जैसे उत्पादों की मांग भारतीय बाजार में लगातार बढ़ रही है।

वैश्विक स्तर पर भी इस श्रेणी के उत्पादों की लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कोका-कोला ने हाल ही में बताया कि उसके कोका-कोला जीरो शुगर ब्रांड की बिक्री मात्रा में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे यह कंपनी के सबसे तेजी से बढ़ने वाले और मजबूत प्रदर्शन करने वाले ब्रांडों में शामिल हो गया है। इस वैश्विक रुझान का प्रभाव भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।

SLMG बेवरेजेज का भारतीय बाजार में विशेष महत्व है क्योंकि यह अकेले कोका-कोला की भारत में कुल बिक्री मात्रा का 22 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभालता है। कंपनी का मानना है कि स्वास्थ्य-केंद्रित पेय पदार्थों की ओर बढ़ता झुकाव आने वाले दशक में उसके लिए एक महत्वपूर्ण विकास इंजन साबित होगा। यही कारण है कि कंपनी अपने उत्पादन और वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की तैयारी कर रही है।

बढ़ती मांग को देखते हुए SLMG ने अगले पांच वर्षों में चार नए बॉटलिंग प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई है। प्रत्येक संयंत्र पर लगभग 1,000 से 1,200 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 तक 10,000 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। इसके साथ ही वह उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे उच्च जनसंख्या वाले राज्यों में अपने कारोबार का तेजी से विस्तार कर रही है, जहां प्रति व्यक्ति शीतल पेय खपत अभी भी अपेक्षाकृत कम है और विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन ने भी इस रणनीति को मजबूती प्रदान की है। वित्त वर्ष 2025 में SLMG का राजस्व 49 प्रतिशत बढ़कर 6,773 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि शुद्ध लाभ में 76 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई और यह 206 करोड़ रुपये हो गया। यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब पेय पदार्थ बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और रिलायंस इंडस्ट्रीज सहित कई क्षेत्रीय ब्रांड उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए नए उत्पाद और रणनीतियां अपना रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जीरो-शुगर और लो-कैलोरी पेय पदार्थों का बाजार आने वाले वर्षों में तेज गति से विस्तार करेगा। बाजार अनुसंधान से जुड़े अनुमान बताते हैं कि इस श्रेणी में दोहरे अंकों की वार्षिक वृद्धि दर देखने को मिल सकती है, क्योंकि अधिक से अधिक उपभोक्ता स्वास्थ्य और स्वाद के बीच संतुलन बनाने वाले विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

SLMG का यह अनुमान केवल एक कारोबारी लक्ष्य नहीं, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं की बदलती सोच और जीवनशैली का भी संकेत है। कभी सीमित वर्ग तक सिमटे रहने वाले शुगर-फ्री पेय पदार्थ अब मुख्यधारा के बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं। यदि यह रुझान इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत का पेय पदार्थ उद्योग एक बड़े परिवर्तन का साक्षी बन सकता है, जहां स्वास्थ्य-केंद्रित उत्पाद विकास और प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन जाएंगे।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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