चीन ने भारतीय मिर्च की खेपें लौटाईं ; क्या किसानों और निर्यातकों के लिए आने वाला है बड़ा संकट?
भारत की लाल मिर्च निर्यात उद्योग को बड़ा झटका लगा है। चीन ने कीटनाशक अवशेष मेथामिडोफोस की अधिक मात्रा मिलने पर भारतीय मिर्च की कुछ खेपों को अस्वीकार कर दिया और तीन भारतीय निर्यातकों को निलंबित कर दिया। यह फैसला किसानों, निर्यातकों और मसाला उद्योग के लिए चिंता का विषय बन गया है।

चीन ने भारतीय सूखी लाल मिर्च की खेप लौटाई
भारत के मसाला निर्यात क्षेत्र के लिए एक चिंताजनक घटनाक्रम सामने आया है। चीन ने भारतीय सूखी लाल मिर्च की कुछ खेपों को कथित तौर पर अस्वीकार कर दिया है और तीन भारतीय निर्यातकों के निर्यात पर रोक लगा दी है। चीनी अधिकारियों का दावा है कि इन खेपों में कीटनाशक अवशेष निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों से अधिक पाए गए, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। इस फैसले ने भारतीय मिर्च निर्यातकों, मसाला उद्योग और लाखों किसानों के बीच चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि चीन भारत की लाल मिर्च का एक प्रमुख आयातक देश है।
मामले के अनुसार, चीन की जांच एजेंसियों ने भारतीय मिर्च की खेपों में मेथामिडोफोस नामक रसायन की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई। मेथामिडोफोस एक ऐसा कीटनाशक है जो मानव तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है और भारत में इसके प्रत्यक्ष उपयोग को मंजूरी नहीं है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह रसायन ऐसिफेट नामक कीटनाशक के विघटन से बन सकता है, जिसका उपयोग भारत में वैध रूप से किया जाता है। इसी कारण चीन ने संबंधित खेपों को अस्वीकार करते हुए तीन भारतीय निर्यातकों को निलंबित कर दिया। हालांकि चीनी अधिकारियों ने इन कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन भारत के सूखे लाल मिर्च निर्यात का एक बड़ा हिस्सा खरीदता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत से निर्यात होने वाली कुल सूखी लाल मिर्च का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा चीन जाता है। इनमें विशेष रूप से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में बड़े पैमाने पर उत्पादित होने वाली तेजा किस्म की मिर्च की मांग अधिक रहती है। पिछले वर्ष भारत ने रिकॉर्ड 2.36 लाख टन लाल मिर्च चीन को निर्यात की थी, जिससे इस व्यापारिक संबंध का महत्व और स्पष्ट हो जाता है।
खाद्य आयात के मामले में चीन सहित अधिकांश देश कीटनाशकों के लिए अधिकतम अवशेष सीमा यानी मैक्सिमम रेजिड्यू लिमिट (MRL) लागू करते हैं। यदि किसी कृषि उत्पाद में निर्धारित सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष पाए जाते हैं तो उस खेप को बंदरगाह पर ही अस्वीकार किया जा सकता है, वापस भेजा जा सकता है या भविष्य की खेपों पर अतिरिक्त निगरानी और जांच लागू की जा सकती है। भारत के मसाला निर्यात मानकों में भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि आयातक देशों द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक अवशेष पाए जाने पर निर्यात खेपों को खारिज किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक व्यापारिक विवाद नहीं बल्कि कृषि गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। कृषि विशेषज्ञ भगीरथ चौधरी ने कहा है कि किसानों को कीटनाशकों के सुरक्षित और नियंत्रित उपयोग के संबंध में बेहतर प्रशिक्षण देने, खेत स्तर पर अवशेष परीक्षण बढ़ाने तथा आधुनिक कीट प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए भारतीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना बेहद जरूरी है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती जांच का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले भारतीय चावल, आम और कुछ मसाला उत्पादों को लेकर भी विभिन्न देशों में गुणवत्ता और अवशेष संबंधी सवाल उठ चुके हैं। ऐसे में मिर्च निर्यात पर आई यह चुनौती भारतीय कृषि निर्यात क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी मानी जा रही है।
इस घटनाक्रम का सीधा असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता है। उन्हें अब अतिरिक्त परीक्षण, गुणवत्ता प्रमाणन और निरीक्षण प्रक्रियाओं पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। वहीं बंदरगाहों पर देरी और बढ़ी हुई निगरानी से व्यापारिक लागत भी बढ़ सकती है। दूसरी ओर किसानों पर भी दबाव बढ़ेगा कि वे ऐसे कीटनाशकों का उपयोग करें जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों, अन्यथा निर्यात मांग प्रभावित होने पर उन्हें कीमतों में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।
अब उम्मीद की जा रही है कि भारतीय निर्यात नियामक संस्थाएं और संबंधित उद्योग संगठन प्रभावित खेपों की जांच करेंगे, खेतों और आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंचकर कारणों का पता लगाएंगे तथा अवशेष निगरानी प्रणाली को और मजबूत बनाएंगे। साथ ही चीन के सीमा शुल्क अधिकारियों के साथ बातचीत कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
हालांकि फिलहाल इसे भारतीय मिर्च पर पूर्ण प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जा रहा है, लेकिन यदि भविष्य में भी इसी तरह की अनियमितताएं सामने आती हैं तो चीन निरीक्षण प्रक्रिया को और सख्त कर सकता है या अतिरिक्त आयात प्रतिबंध लागू कर सकता है। ऐसे किसी भी कदम का असर भारत के सबसे महत्वपूर्ण मसाला निर्यात क्षेत्रों में से एक पर पड़ेगा और लाखों किसानों की आय तथा निर्यात उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
